1857 का विद्रोह का परिणाम

यद्यपि कि अंग्रेजों ने इस विद्रोह का बड़ी ही क्रूरता के साथ दमन कर दिया लेकिन इसके बावजूद इस विद्रोह ने ब्रिटिश हुकूमत की नीव हिला दी ‌। क्रेमर ने इसके बारे में कहा- कितना अच्छा होता यदि ब्रिटेन के लोग इस विद्रोह के बारे में पढ़ते क्योंकि इसमें ढेरों सीखने की चीजें शामिल थी ।
     इस विद्रोह के पश्चात ही महारानी विक्टोरिया द्वारा भारत शासन अधिनियम 1858 की घोषणा की गई जिसे लॉर्ड कैनिंग द्वारा इलाहाबाद के मिंटो पार्क में पढ़ा गया ।
     इसमें शामिल मुख्य बातें -
ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकार को समाप्त कर, यह अधिकार ब्रिटिश क्राउन को दिया गया । जिस बदलाव के बारे में कनिंघम ने कहा यह बदलाव कुछ नहीं मात्र नाम को बदला जाना था ।
 एक भारत सचिव के पद का सृजन किया गया । इसे लंदन में बैठकर शासन का संचालन करना था । जिसकी सहायता के लिए एक 15 सदस्यीय परिषद का गठन किया गया जिसके 8 सदस्य सरकारी तथा 7 सदस्य बोर्ड आफ डायरेक्टर्स से नियुक्त किए जाने थे ।
 इसी घोषणा के साथ ही गवर्नर जनरल को वायसराय कहा जाने लगा । इस तरह भारत के अंतिम गवर्नर जनरल कैनिंग बने और यही भारत के पहले वायसराय भी बने ।
 इस विद्रोह के कारण का पता लगाने के लिए एक पील कमीशन का गठन हुआ । जिसके द्वारा इस विद्रोह का कारण अंग्रेज और भारतीय सैनिकों के बीच असंतुलित अनुपात को कारण बताया, जो 1:5 का था और इसी सुझाव के चलते अंग्रेजों ने अंग्रेज सैनिकों की संख्या 40000 से बढ़ाकर ₹65000 जबकि भारतीय सैनिकों की संख्या 2.38 लाख से घटाकर 180000 कर दिया गया और बंगाल सैनिकों के अनुपात को 1:2 तथा मुंबई में 2:5  किया गया ।

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