जापान की पराजय तथा द्वितीय विश्व युद्ध का अंत

 1942 से 1945 का घटनाक्रम- 

1942 में जापान ने ईस्टइंडीज पर अधिकार कर लिया तथा मलाया व सिंगापुर को भी अधिग्रहित कर लिया। इस समय सोवियत संघ में जर्मन सेनाएं पराजित हुई तथा अफ़्रीका में जर्मनी पराजित हुआ अर्थात मित्र राष्ट्रों की विजय का मार्ग खुल गया।
             1943 ईस्वी तक मित्र राष्ट्रों ने जर्मनी पर भीषण बमबारी आरंभ कर दी। सोवियत संघ ने भी जर्मनी पर हमला बोल दिया। 1944 ईस्वी में मित्र राष्ट्रों ने रोम पर अधिकार स्थापित कर लिया। पूर्वी यूरोप में जर्मनी के प्रभुत्व का अंत हो गया। फ्रांस में मित्र राष्ट्रों ने जर्मन सेना को पराजित कर दिया। अब फ्रांस जर्मन आधिपत्य से मुक्त हो गया।23 अगस्त 1944 ईस्वी को जनरल डीगाल ने पेरिस के राज महल पर फ्रांस का राष्ट्रीय झंडा फहराया। इधर अमेरिकी सेना ने जापान को परास्त कर मार्शल द्वीप पर अधिकार कर लिया।
जापान की पराजय तथा द्वितीय विश्व युद्ध का अंत:- पर्ल हार्वर पर जापानी आक्रमण के प्रतिशोध में अमेरिका ने 6 अगस्त 1945 ईस्वी को जापान के हिरोशिमा और 9 अगस्त को नागासाकी नगरों पर परमाणु बम गिराया। इस घटना से जापान में भारी धन-जन की हानि हुई और विवश होकर जापान ने 14 अगस्त 1945 ईस्वी को मित्र राष्ट्रों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इधर मित्र राष्ट्रों ने जर्मनी का सीधा आक्रमण प्रारंभ कर दिया। सोवियत सेना ने जर्मनी को पराजित करती हुई बर्लिन पहुंचने में सफल हुई। जर्मनी की पराजय को अवश्यंभावी देखकर हिटलर ने 1 मई को आत्महत्या कर ली।इसके बाद एडमिरल डोनिज ने जर्मनी के प्रधान का पद ग्रहण किया तथा 2 मई 1945 ईस्वी को मित्र राष्ट्रों के सामने घुटने टेक दिए। 7 मई 1945 ईस्वी को विराम संधि पर हस्ताक्षर कर दिया।जर्मनी व जापान के आत्मसमर्पण के साथ द्वितीय विश्व युद्ध का अंत हो गया।

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