आधुनिक भारत का इतिहास, Chap-3, इंगलिश ईस्ट इन्डिया कम्पनी और बंगाल Day -3, बक्सर का युध्द

अन्तत: 22 मार्च, 1763 ई० में मीर कासिम ने भारतीय व्यापारियों के लिए भी शुल्क मुक्त व्यापार की अनुमति प्रदान कर दी जिससे अंग्रेज खफा हो गये और मीर कासिम को हटा कर मीर जाफर को एक बार फिर से बंगाल का नवाब बना दिया।

* इसके बाद मीर कासिम अवध के नवाब शुजाउद्दौला ( सिराजुद्दौला से कन्फ्यूज न हों सिराजुद्दौला बंगाल का नवाब था। ) की शरण में पहुँचा और उससे तथा मुगल सम्राट शाहआलम द्वितीय के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ एक त्रिगुट का निर्माण किया। और बनारस के पूर्व में बिहार में स्थित बक्सर के युध्द में 22 अक्तूबर, 1764 ई० को अंग्रेजों को ललकारा। 

हैक्टर मुनरो के नेतृत्व वाली अंग्रेज सेना ने त्रिगुट को बुरी तरह से पराजित कर दिया।

* बक्सर के युध्द के समय बंगाल का गवर्नर वेन्सिटार्ट था, जबकि मुगल बादशाह शाहआलम द्वितीय, बंगाल का नवाब मीर जाफर  और अंग्रेजी सेना का सेनापति  ''हैक्टर मुनरो ।   M. Imp.

               इलाहाबाद की प्रथम संधि 

अब एक बार फिर से रॉबर्ट क्लाइव को बंगाल का गवर्नर बना कर भारत भेजा गया। उसने पराजित मुगल बादशाह शाहआलम द्वितीय के साथ 12 अगस्त, 1765 ई० को इलाहाबाद में एक संधि हुई जिसे इलाहाबाद की प्रथम संधि कह कर पुकारा जाता है। 

इस संधि में निम्नलिखित बातें  कही गयीं -

1- मुगल सम्राट शाहआलम द्वितीय ने ईस्ट इन्डिया कम्पनी के बंगाल, बिहार व उड़ीसा के दीवानी अधिकार प्रदान कर दिये।

2- इसके बदले कम्पनी के द्वारा सम्राट को 26 लाख रु० व बंगाल के नवाब को निजामत कार्य के लिए 53 लाख रु० देने थे।

3- दीवानी अधिकार के अंतर्गत भू-राजस्व के अलावा सभी दीवानी से संबंधित सभी मामले आते थे। शेष सभी कार्यों को निजामत कार्य के अंतर्गत रखा गया।

4- इलाहावाद व कड़ा जिले को अवध के नवाब शुजाउद्दौला से लेकर बादशाह शाहआलम द्वितीय को दिया जाना था।

5- शाहआलम द्वितीय को अंग्रेजों ने अपने संरक्षण में ले लिया और उसे इलाहावाद में रखा गया। बाद में यानी 1772 ई० में मराठा पेशवा माधवराव प्रथम ने मुगल सम्राट शाहआलम द्वितीय को एक बार फिर से दिल्ली की गद्दी पर बैठाया और अपना पेंशनर बना लिया।

इस संधि के साथ ही बंगाल, बिहार व उड़ीसा के क्षेत्र में द्वैद शासन की शुरुआत हुई , जिसमें कम्पनी दीवान थी और नवाब नाजिम।

*** द्वैद शासन शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग लियो कार्टियस ने किया। 

* यह द्वैद शासन 1765 से लेकर 1772 ई० तक चलता रहा। 1772 ई० में वारेन हैस्टिंग्स ने इसे समाप्त किया।

             

                    अध्याय 3 समाप्त.                   

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