द्वितीय विश्व युद्ध के परिणाम-२

साम्राज्यवाद का अंत तथा लोकतांत्रिक भावना का विकास:- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पराधीन देशों में राष्ट्रीयता एवं देशभक्ति का संचार हुआ। ये देश स्वतंत्रता संघर्ष की ओर प्रेरित हुए। धीरे-धीरे अफ्रीका और एशिया के देश स्वतंत्र होते चले गए। इस प्रकार साम्राज्यवाद का अंत हो गया।
      विश्व का गुटीय विभाजन:- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संपूर्ण विश्व दो गुटों पूंजीवादी व साम्यवादी में विभाजित हो गया। पूंजीवादी गुट का नेतृत्व संयुक्त राज्य अमेरिका ने तथा साम्यवादी गुट का नेतृत्व सोवियत संघ रूस ने किया।
      आर्थिक प्रभाव क्षेत्रों का निर्माण:- गुटीय विभाजन के परिणाम स्वरूप संयुक्त राज्य अमेरिका तथा सोवियत संघ आर्थिक प्रभाव क्षेत्रों के निर्माण में संलग्न हो गए।दोनों देश निर्बल राष्ट्रों को आर्थिक सहायता देकर उन्हें अपने अपने प्रभाव क्षेत्र में लाने के लिए प्रयत्नशील हो गए।
    संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना:- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया भर में त्राहि-त्राहि मच गई। चारों तरफ से शांति चाहिए की आवाज गूंजने लगी।
इस महायुद्ध की विनाश लीला ने मानव को प्रेरित किया कि वह इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थाई संगठन की रचना करें।विजेता राष्ट्रों ने विश्व शांति के उद्देश्य से 24 अक्टूबर 1945 ईस्वी को संयुक्त राष्ट्र संघ नामक एक अंतरराष्ट्रीय संगठन की स्थापना की।

"मैं एक भयानक जुआ खेल रहा हूं। मुझे विजय और विनाश में एक को चुनना है।मैं किसी बात का संकोच नहीं करूंगा। जो मेरा विरोध करेगा मैं उसका सर्वनाश कर दूंगा। इस संघर्ष में या तो मेरी विजय होगी या मैं खत्म हो जाऊंगा।अपने राष्ट्र की पराजय के बाद में जिंदा नहीं रहूंगा लेकिन पराजय नहीं होगी; हम विजयी होंगे। हमारा जो हमारे राष्ट्र के इतिहास में विलीन हो जाएगा।"
               हिटलर

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