उत्तर प्रदेश : ऐतिहासिक एवं भौगोलिक परिदृश्य

  •  प्राचीन काल से लेकर उत्तर प्रदेश राज्य के गठन तक विभिन्न स्रोतों से राज्य की ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त होती है।
  • उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद के बेलन घाटी, सोनभद्र जनपद के सिंगरौली घाटी तथा चंदौली जनपद के चकिया क्षेत्र से पुरापाषाण कालीन सभ्यता के अनेक प्रमाण प्राप्त हुए हैं।
  • प्रयागराज के मेजा तहसील से झोपड़ी तथा मिट्टी के बर्तन मिले हैं।
  • बेलन घाटी के लोहरानाला क्षेत्र से कुल्हाड़ी, हंसिया एवं गड़ासा आदि प्राप्त हुए हैं। बेलन घाटी की खुदाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर जी.आर.शर्मा के नेतृत्व में की गई थी।
  • प्रदेश के आलमगीरपुर (मेरठ-हिंडन नदी) बड़ागांव तथा हुलास (सहारनपुर) से ताम्र-कास्य संस्कृति के प्रमाण मिले हैं।
  • लोहरानाला क्षेत्र में औजारों के साथ ही अस्थि से बनी हुई मातृृदेवी की मूर्ति एवं क्वार्टजाइट पत्थर से बने औजार प्राप्त हुए हैं।
  • सरायनाहर राय क्षेत्र से 15 शवदाह केंद्र के प्रमाण मिले हैं। शवदाह गृह में मृतक का सिर पश्चिम दिशा की ओर रखा गया है।
  • प्रतापगढ़ के दमदमा से एक ही कब्र से तीन कंकाल मिले हैं।
  • विंध्य क्षेत्र में लेखटीया शिलाश्रय से सर्वाधिक मानव कंकाल मिले हैं।
  • कृषि का सबसे प्राचीन साक्ष्य लहुरादेव (संत कबीरनगर) से प्राप्त हुआ है।
  • उत्तर प्रदेश में ताम्र पाषाण काल की सभ्यता के प्रमाण मेरठ तथा सहारनपुर से प्राप्त हुए हैं।
  • मेरठ के आलमगीरपुर से कपास उत्पादन के साक्ष्य मिले हैं।
  • उत्तर प्रदेश में ताम्र कांस्य काल (सेंधव सभ्यता काल) के प्रमाण आलमगीरपुर (मेरठ), बड़ागांव हुलास (सहारनपुर) से प्राप्त हुए हैं। इस सभ्यता के लोग आलमगीरपुर में कपास की खेती करते थे तथा नगरों के सिवाय गांव में रहते थे।
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