आधुनिक भारत का इतिहास Chap-4, इंगलिश ईस्ट इन्डिया कम्पनी तथा मैसूर, Day-1

* 1565 ई० में तालीकोटा के युध्द में बीदर, अहमदनगर, बीजापुर तथा गोलकुण्डा की संयुक्त सेना ने विजयनगर की सेना को पराजित कर दिया।

यद्यपि इसके बाद भी विजयनगर का अस्तित्व कुछ वर्षों के लिए बना रहा, तथापि उसके वास्तविक गौरव गाथा का अंत इसी तालीकोटा युध्द के बाद हो गया। विजयनगर के अवसान के पश्चात दक्षिण भारत में कई स्वतंत्र राज्यों का उदय हुआ था। उसमें से एक प्रसिध्द राज्य मैसूर था। मैसूर में वोडियार वंश का शासन था, जिसका अंतिम शासक चिक्का कृष्ण राज द्वितीय था, जो कि एक कमजोर शासक था। इसके शासन काल में नन्जराज व देवराज नामक दो भाइयों का मैसूर राज्य में जबरदस्त प्रभाव था। नन्जराज वित्तव्यवस्था का प्रधान नियंत्रक था। इसी नन्जराज ने सर्वप्रथम मैसूर के प्रशासन में हैदरअली को शामिल किया।

हैदर अली 

हैदर अली शुरु से ही बहादुर था। हैदर का अर्थ ही होता है - सिंह।

* 1753 ई० में हैदरअली डिन्डीगुल का फौजदार नियुक्त हुआ।

* मैसूर में हैदरअली ने काफी तेजी से सत्ता का अधिग्रहण किया। उसने वहाँ के शासक का पक्ष लेते हुए नन्जराज के खिलाफ संघर्ष किया और 1760-61 ई० में नन्जराज को हटाकर रियासत स्वंय सम्भाल ली। उसने खुद को राजा की जगह अपने बिठाने की कोशिश नहीं की।

* उसने अपनी सेना का यूरोपीय पर तर्ज पर आधुनिकीकरण का प्रयास किया। उसने पत्थर कला बन्दूकों से लैस नियमित सैनिकों के दस्ते बनवाये।

* हैदरअली अपने समय का अकेला भारतीय नरेश था, जिसने अपने समुद्र-तट की रक्षा के लिए एक जहाजी बेड़ी, जिसके हर जहाज पर तोपें लगी हुई थीं, रख रखा था। 

* इस समय दक्षिण भारत में मद्रास क्षेत्र पर अंग्रेजों का प्रभाव स्थापित हो चुका था और हैदरअली की बढ़ती शक्ति अंग्रेजों के लिए चिंता का विषय बन गया था।

* अंग्रेजों के साथ मैसूर के कुल चार संघर्ष हुए थे - 

इनकी चर्चा आगे करेंगे। 

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