गुप्त काल

* कुषाण साम्राज्य के विघटन के उपरांत गुप्त साम्राज्य का उदय हुआ तथा इसने संपूर्ण उत्तर भारत को राजनीतिक एकता के सूत्र में बांध रखा।

* गण राज्यों का शासन था । मगध में गुप्त राजवंश की स्थापना 275 ईसवी में महाराज श्री गुप्त द्वारा की गई लेकिन इस वंश का वास्तविक संस्थापक घटोत्कच था।

* घटोत्कच के बाद उसका पुत्र चंद्रगुप्त प्रथम मगध का शासक बना। किसने मगध की सीमा को काशी तथा कौशल तक बढ़ाया। इसी ने 319 से 320 ईस्वी में गुप्त संवत का परिवर्तन किया। चंद्रगुप्त प्रथम के बाद उसके पुत्र समुद्रगुप्त ने मगध साम्राज्य की बागडोर संभाली। इसे भारत का नेपोलियन कहा जाता है।

* इसके उत्तरा पथ एवं दक्षिणा पथ अभियानों का उल्लेख प्रयाग प्रशस्ति में किया गया है। उत्तरा पथ के 12 राज्यों में से चार उत्तर प्रदेश में अवस्थित है। 

* अतः संपूर्ण उत्तर प्रदेश गुप्त साम्राज्य का अंग था। समुद्रगुप्त के बाद उसका पुत्र चंद्रगुप्त द्वितीय               ( विक्रमादित्य) गद्दीदी पर बैठा ।

* उसके दरबार में 9 विद्वानों की एक मंडली थी जिसमें कालिदास, धन्वंतरि, छमड़क, अमर सिंह, शंकु, बेताल भट्ट, घटकर्पर, वारामिहिर व वरूचि सम्मिलित थे। इस के शासनकाल को गुप्त काल का स्वर्ण युग कहा जाता है। मंदिर कला का विकास गुप्त काल में ही हुआ।

* गुप्त काल में सारनाथ एवं मथुरा में उत्कृष्ट बब्लू प्रतिमाओं का निर्माण हुआ उत्तर प्रदेश में कानपुर के भीतर गांव गाजीपुर के भीतरी तथा झांसी के देवगढ़ में निर्मित ईट के मंदिर गुप्त कालीन वास्तुकला के सुंदर उदाहरण हैं

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