अंग्रेजों का आगमन:- दिसंबर 1600 ईसवी में लंदन के कुछ व्यापारियों की एक कंपनी को पूर्वी देशों से व्यापार करने का अधिकार प्रदान किया गया। यही कंपनी कालांतर में ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम से प्रसिद्ध हुई। ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना मूलतः एक व्यापारिक कंपनी के रूप में हुई थी।इसलिए आरंभ के वर्षों में कंपनी का उद्देश्य अपने व्यापारिक विकास के लिए अधिकारिक सुविधाएं प्राप्त करना था, परंतु बाद में भारत में व्याप्त राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए उसका उद्देश्य बदल गया। अब कंपनी व्यापार के साथ-साथ भारत की राजनीतिक सत्ता को प्राप्त करने के लिए भी तत्पर हो गई। कैप्टन हॉकिंस (1611 ई.) और टॉमस करो (1615ई.)ने जहांगीर से भारत में व्यापार करने का अनुमति पत्र प्राप्त कर लिया।इसके पश्चात अंग्रेजों ने पहले डचों और बाद में फ्रांसीसीओं को हटाकर भारतीय व्यापार पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया।
फ्रांसीसियों का आगमन:- 1644 ईसवी में फ्रांसीसियों ने फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की । फ्रांसीसियों ने पांडिचेरी और चंद्रनगर में व्यापारिक कोठियां स्थापित कर भारत में व्यापार करना प्रारंभ किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपने कई उपनिवेश स्थापित किए। फ्रांसीसी गवर्नर डुप्ले ने भारत में फ्रांसीसी साम्राज्य स्थापित करने का प्रयास किया। परिणाम स्वरूप फ्रांसीसिओं और अंग्रेजो के बीच कई युद्ध हुए और अंत में फ्रांसीसी अंग्रेजों के समक्ष असफल हुए।
इस प्रकार 17 शताब्दी में डच, फ्रांसीसी और अंग्रेजो के बीच व्यापारिक एवं साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्धा उत्पन्न हो गई। परिणाम स्वरूप इन शक्तियों में युद्ध हुए किंतु सफलता अंग्रेजों को ही प्राप्त हुई।