जिस समय कर्नाटक में अंग्रेजों और फ्रांसीसी में के मध्य युद्ध चल रहा था बंगाल में अलवर्दी खां का शासन था। संत 1756 ईस्वी में उसकी मृत्यु के पश्चात सिराजुद्दोला बंगाल का नवाब बनाया गया, जो अयोग्य एवं हठी स्वभाव का था फिर भी वह अंग्रेजों की बढ़ती हुई शक्ति से चिंतित था। अंग्रेजों ने अपनी व्यापारिक सुविधाओं का दुरुपयोग करना प्रारंभ कर दिया था। नवाब तथा अंग्रेजों में वैमनस्यता का सबसे बड़ा कारण अंग्रेजों द्वारा किलेबंदी करना था। सिराजुद्दौला को यह बात पसंद नहीं थी। अतः उसने कासिम बाजार की कोठी पर आक्रमण कर दिया, अंग्रेजों ने कमजोर स्थिति को देखते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद नवाब सिराजुद्दौला ने फोर्ट विलियम दुर्ग पर भी आक्रमण कर दिया। जिसमें अंग्रेज बुरी तरह पराजित हुए। हालवेल का कहना है कि नवाब ने 146 अंग्रेजों को एक छोटी-सी कोठरी में बंद कर दिया। प्राय: पता चला 146 में से 123 ने दम तोड़ दिया।यह घटना काल कोठरी की घटना के नाम से प्रसिद्ध है इसकी सत्यता का अन्य प्रमाण नहीं मिलता।
अभी इस स्थिति में लॉर्ड क्लाइव को दक्षिण से बंगाल बुला लिया गया। लॉर्ड क्लाइव ने छल से नवाब के सेनापति मीर जाफर को नवाब बनाने का लालच देकर अपनी ओर मिला लिया। धीरे- धीरे अंग्रेजों और नवाब के मध्य वैमनस्यता बढ़ती गई। जिसका परिणाम 1757 ईस्वी के प्लासी के युद्ध के रूप में प्रकट हुआ इस युद्ध में सिराजुद्दौला की पराजय हुई मीर जाफर का विश्वासघात ही सिराजुद्दौला की पराजय का मुख्य कारण बना।
प्लासी में सिराजुद्दौला की पराजय के बाद अंग्रेजों ने मीर जाफर को बंगाल का नवाब बना दिया। मीर जाफर अंग्रेजों द्वारा की जाने वाली मांगों को अधिक समय तक नहीं पूरा कर सका।अतः अंग्रेजों ने मीर जाफर को भी नवाब की गद्दी से हटाकर मीर कासिम को बंगाल का नवाब बना दिया।