गंगा-यमुना का मैदानी क्षेत्र

* दक्षिण के पठारी क्षेत्र और उत्तर के भाबर तराई क्षेत्र के मध्य क्षेत्र को मैदानी क्षेत्र या गंगा यमुना का मैदानी तो आप कहा जाता है।

* यह मैदानी क्षेत्र तराई क्षेत्र के दक्षिण में अवस्थित है तथा इसका निर्माण करूंगा एवं उसकी सहायक नदियां यमुना राम गंगा गोमती घाघरा शारदा ताप्ती गंडक आदि द्वारा निक्षेपित कांप मिट्टी कीचड़ एवं बालू द्वारा हुआ है।

* भूगर्भिक दृष्टि से इस मैदानी क्षेत्र का निर्माण अभिनुतन एवं अति नूतनकाल में हुआ है।

* संरचना के आधार पर इस मैदानी क्षेत्र के दो भागों में विभाजित किया गया है।

1. बांगर क्षेत्र

* बांगर क्षेत्र से तात्पर्य उस क्षेत्र से जहां नदियों की बाढ़ का पानी नहीं पहुंच पाता है तथा वहां पुरानी का मिट्टी का जमाव है क्षेत्र में भूमि ऊंची होती है।

2. खादर क्षेत्र

* इसका निर्माण नई जलोढ़ मिट्टी द्वारा होता है यह क्षेत्र प्रतिवर्ष बाढ़ द्वारा प्रभावित होता है

खादर क्षेत्र बांदा की अपेक्षा अधिक उपजाऊ होता है।

3. तराई क्षेत्र

* यह उत्तर पश्चिम में सहारनपुर से लेकर पूर्व में देवरिया जिले तक विस्तृत है तथा क्षेत्र के अंतर्गत सहारनपुर, बिजनौर, बरेली,  पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, गोंडा,  बस्ती, गोरखपुर, देवरिया जिलों के उत्तरी भाग सम्मिलित हैं।

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