उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक संरचना

उत्तर प्रदेश भारतीय राज्य का एक प्रमुख इकाई राज्य है अतः उत्तर प्रदेश का शासन संविधान के भाग 6 ( अनुच्छेद 152 से 237 तक ) के अनुरूप संचालित होता है।

* जनसंख्या की दृष्टि से या भारत का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है। इसके फलस्वरूप यहां लोकसभा तथा राज्यसभा में सर्वाधिक संख्या में जनप्रतिनिधियों को प्रतिनिधित्व प्राप्त है । इसके साथ ही उत्तर प्रदेश भारत में सर्वाधिक विधान सभा तथा विधान परिषद सीट वाला राज्य है। उत्तर प्रदेश में संसदीय शासन प्रणाली लागू है जिसके तीन प्रमुख अंग निम्न प्रकार है--

1. कार्यपालिका ( राज्यपाल मंत्री परिषद तथा सचिवालय विभाग)

2. व्यवस्थापिका ( राज्यपाल विधान सभा तथा विधान परिषद)

3. उच्च एवं अधीनस्थ न्यायालय

1. कार्यपालिका के अंतर्गत राज्यपाल मंत्री परिषद तथा सचिवालय विभाग सम्मिलित है जो निम्न प्रकार है

* राज्यपाल राज्य कार्यपालिका का शीर्ष स्तंभ है जो राज्य अध्यक्ष कहलाता है जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करता है राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित है जिसका प्रयोग संविधान के अनुरूप या तो वह स्वयं करता है अथवा अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करता है।

*इसका कार्यकाल सामान्य रूप से 5 वर्ष का होता है किंतु व राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत ही अपने पद पर रहता है वह राज्य मंत्रिमंडल के परामर्श के अनुसार कार्य करता है कुछ परिस्थितियों में वह अपने विवेक के अनुसार कार्य करता है केंद्रीय विश्वविद्यालयों को छोड़कर वह राज्य के सभी विश्वविद्यालयों का कुलपति भी होता है।

* स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उत्तर प्रदेश के प्रथम राज्यपाल श्रीमती सरोजनी नायडू थी जो किसी भी भारतीय राज्य की प्रथम महिला राज्यपाल थी।

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