बक्सर का युद्ध

यद्यपि अंग्रेजों ने अपने स्वार्थ में मीर कासिम को बंगाल का नवाब बनाया था, किंतु वह अंग्रेजों के अनुकूल प्रमाणित नहीं हुआ। उसने कुछ ऐसे कार्यों का संपादन किया जो अंग्रेजों के हित के प्रतिकूल थे, जैसे मीर कासिम ने अपनी राजधानी मुर्शिदाबाद से मुंगेर बना दिया।साथ ही अंग्रेज व्यापारियों की भांति भारतीय व्यापारियों को भी व्यापार में छूट दी गई।इसी तरह कुछ ऐसी घटनाएं घटी जिससे अंग्रेज और मीर कासिम के बीच युद्ध अनिवार्य हो गया। मीर कासिम का युद्ध में पराजित होने के बाद अवध चला गया। जहां मुगल सम्राट शाह आलम तथा अवध के नवाब शुजाउद्दौला से संधि कर लिया। 1764 ईस्वी में दोनों पक्षों की सेनाओं का सामना बक्सर के मैदान में हुआ जिसमें मीर कासिम पराजित हुआ और भागकर इलाहाबाद पहुंच गया। बक्सर के इस युद्ध में एक पक्ष शुजाउद्दौला ,शाहआलम तथा मीर कासिम का था तथा दूसरा पक्ष अंग्रेजों का।यह युद्ध निर्णायक प्रमाणित हुआ क्योंकि इसमें मीर कासिम ही नहीं अवध के नवाब तथा मुगल सम्राट भी पराजित हो गए। सन 1765 इस्वी में लॉर्ड क्लाइव पुणे गवर्नर जनरल बनकर भारत लौटा।इस बार आने पर उसने सबसे महत्वपूर्ण कार्य को क्रियान्वित किया जिसे बंगाल का दोहरा शासन प्रबंध कहते हैं।इसका तात्पर्य यह है कि दीवानी वसूलने का कार्य तो अंग्रेजो के पास रहा किंतु बंगाल बिहार और उड़ीसा के शासन व्यवस्था का दायित्व नवाब को दे दिया गया। इस व्यवस्था से बंगाल बिहार और उड़ीसा की आर्थिक स्थिति पूर्णता बिगड़ गई।
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