धार्मिक कारण--
ईसाई धर्म का प्रचार:- अंग्रेजों ने भारतीयों का धार्मिक उत्पीड़न किया। अंग्रेज अधिकारी मेजर एडवर्ड्स ने स्पष्ट रूप से कहा था" भारत पर हमारे अधिकार का अंतिम उद्देश्य पूरे देश को सही बनाना है"अंग्रेज अधिकारी भारतीय सैनिकों को ईसाई बनने के लिए प्रेरित करते थे। अंग्रेजों की यह धर्मांतरण की नीति उनके विरुद्ध संघर्ष का कारण बन गई।
गोद-निषेध की नीति धर्म विरुद्ध:- लॉर्ड डलहौजी ने गोद लेने की प्रथा का अंत कर भारतीयों की धार्मिक भावनाओं एवं मान्यताओं का तिरस्कार किया, जिससे भारतीय अंग्रेजों के विरुद्ध होते चले गए।
धार्मिक भेदभाव की नीति:- सरकार की ओर से ईसाई धर्म स्वीकार करने वालों को आर्थिक सहायता दी जाने लगी तथा उन्हें सरकारी नौकरी भी आसानी से प्राप्त होने लगी। इससे भी भारतीय समाज में अंग्रेजों के प्रति प्रतिशोध की भावना पैदा हो गई।
सामाजिक कारण:-
भारतीयों के प्रति तिरस्कार की नीति- अंग्रेज भारतीयों को हीन समझते थे तथा उनका तिरस्कार करते थे।भारतीयों को सामाजिक अपमान अशह्य था, इससे भी भारतीय अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध आंदोलित हो गए।
भारतीयों के साथ अपमानजनक व्यवहार- यूरोपीय अधिकारी वर्ग भारतीयों के प्रति बहुत कठोर तथा असहनशील थे। वे भारतीयों को काले अथवा सूअर की संज्ञा देते थे। अंग्रेज प्रत्येक अवसर पर भारतीयों का अपमान करने से नहीं चूकते थे।अंग्रेजों के अपमानजनक व्यवहार को भारतीय स्वाभिमान बर्दाश्त ना कर सका और अपने अपमान के प्रतिशोध अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए कमर कसकर तैयार हो गया।