सैनिक कारण--
उच्च पदों से वंचित भारतीय:- सेना में ऊंचा से ऊंचा पद जो किसी भारतीय को मिल सकता था वह सूबेदार का था जिसमें केवल ₹60 या ₹70 मासिक वेतन मिलता था। इसमें पद वृद्धि के अवसर बहुत ही कम थे।समान पदों पर कार्य करते हुए भी भारतीय सैनिकों को वे सुख सुविधाएं नहीं प्राप्त होती थी जो अंग्रेज सैनिकों को प्रदान की जाती थी। भेदभाव की इस नीति ने सैनिकों में क्रांति की भावना भर दी।
चर्बी युक्त कारतूसों का प्रयोग:-1856 में अंग्रेजी सरकार ने पुरानी लोहे वाली बंदूक के स्थान पर एक नवीन राइफल जो अधिक अच्छी थी का प्रयोग करने का निश्चय किया। इस नई राइफल में कारतूस के ऊपरी भाग को मुंह से काटना पड़ता था। जनवरी 1857 ईसवी में बंगाल सेना में यह बात फैल गई कि नई राइफल के कारतूस में गाय और सुअर की चर्बी है।सैनिकों को विश्वास हो गया कि चर्बी वाले कारतूस ओं का प्रयोग उन्हें धर्म भ्रष्ट करने का एक निश्चित षड्यंत्र है। परिणाम स्वरूप सैनिकों में क्रांति की ज्वाला भड़क उठी।
वेतन में असमानता:- अंग्रेज सिपाहियों की अपेक्षा भारतीय सिपाहियों को कम वेतन मिलता था। यह समानता भारतीय सैनिकों के लिए असह्य हो गई।
सरकारी नौकरियों में भेदभाव :- सरकारी नौकरियों में उच्च पदों पर केवल ब्रिटिश नागरिक ही नियुक्त किए जाते थे।भारतीयों को उच्च सेवा करने का अधिकार नहीं था फलत: भारतीय बुद्धिजीवी के मन में क्रांति की ज्वाला फूट पड़ी।