1857 ईस्वी की क्रांति का विस्फोट

सैनिकों द्वारा चर्बी वाले कारतूस ओं का प्रयोग करना अस्वीकार कर दिए जाने पर उन पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर उन्हें दंडित किया गया विरोध में 6 अप्रैल 1857 ईस्वी को बैरकपुर छावनी में सैनिकों ने ना केवल विद्रोह किया वरन मंगल पांडे नामक वीर सैनिक ने अपने एडजुटेंट की गोली मारकर हत्या कर दी।परिणाम स्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 ईस्वी को फांसी पर चढ़ा दिया गया। मई 1857 ई. में मेरठ में सैनिकों ने इन कारतूसों का प्रयोग करने से इनकार कर दिया। उन्हें सैनिक न्यायालय ने दीर्घकालीन कारावास का कठोर दंड सुनाया। फलत: 10 मई को सैनिकों ने खुला विद्रोह कर दिया और अपने अधिकारियों पर गोली चला दी। अपने बंदी साथियों को मुक्त कराकर भी लोग दिल्ली की ओर चल पड़े।
क्रांतिकारियों ने 12 मई को दिल्ली पर अधिकार कर लिया और बहादुर शाह द्वितीय को भारत का सम्राट घोषित कर दिया।
क्रांति शीघ्र ही समस्त उत्तरी भारत और मध्य भारत में फैल गई। लखनऊ इलाहाबाद कानपुर बरेली बनारस बिहार के कुछ भाग झांसी और कुछ अन्य क्षेत्रों में भी क्रांति भड़क उठी। दिल्ली नगर का हाथ से निकलना अंग्रेजों के लिए भारी क्षति थी।इसलिए अंग्रेजों ने दिल्ली को फिर से प्राप्त करने का प्रयत्न किया पंजाब से सेना ने बुलाई गई और उत्तर की ओर से आक्रमण किया गया।भारतीय सैनिकों ने घोर संग्राम किया किंतु अंत में सितंबर 1857 की स्थिति में अंग्रेजों का दिल्ली पर पुनः अधिकार हो गया। इसी प्रकार धीरे धीरे अंग्रेजों ने फिर से समग्र भारत पर अपनी सत्ता स्थापित कर ली।
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