मंगल पांडे:- मंगल पांडे बैरकपुर की ब्रिटिश छावनी के एक बहादुर सैनिक थे।6 अप्रैल 1857 ईस्वी को परेड करते समय उन्होंने गाय और सुअर की चर्बी से युक्त कारतूस का प्रयोग करने से साफ इंकार कर दिया। अत अंग्रेज अधिकारियों ने उन्हें हथियार डाल देने का आदेश दिया तो उन्होंने उत्तेजित होकर दो अंग्रेज अधिकारियों को गोलियों से छलनी कर दिया। बाद में वीर मंगल पांडे को बंदी बनाकर 8 अप्रैल 1857 ई. को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। मंगल पांडे का यह बलिदान 1857 ईस्वी की क्रांति का तात्कालिक कारण बन गया।
बहादुरशाह जफर:- बहादुर शाह जफर भारत के अंतिम मुगल सम्राट थे।यद्यपि उनकी शक्ति क्षीण हो चुकी थी फिर भी जब मई 1857 ईस्वी को मेरठ के क्रांतिकारियों ने बहादुरशाह को अपना नेता चुना और क्रांति की बागडोर उन्हें सौंप दी तो उन्होंने वीरता पूर्वक अंग्रेजों से लोहा लिया और 3 माह तक दिल्ली को अंग्रेजों के प्रभाव से मुक्त रखा, किंतु अंग्रेजों की बढ़ती हुई शक्ति के सामने अंततः उन्हें पराजित होकर बंदी होना पड़ा, 1862 ईस्वी में उनकी मृत्यु हो गई।
नाना साहब:- नाना साहब मराठा पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र थे। इनका वास्तविक नाम धुन्धु पंत था। अंग्रेजों ने उन्हें पेंशन देकर बिठूर भेज दिया था। कालांतर में लॉर्ड डलहौजी ने उनकी पेंशन बंद कर दी जिससे नाना साहब अंग्रेजों की विरोधी हो गए और 1857 इसवी के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कानपुर को अंग्रेजों से छीन लिया।
कुंवर सिंह:- कुंवर सिंह जगदीशपुर के राजा थे प्रथम स्वाधीनता आंदोलन को कुमार सिंह ने भरपूर सहयोग दिया तथा स्वयं अनेक स्थानों पर अंग्रेजी सेना से जमकर लोहा लिया, और अंग्रेजों को पराजित किया कुंवर सिंह के राष्ट्रपति थे। वे आजीवन राष्ट्र सेवा में लगे रहे।