माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर-

  माइक्रोफोन-

                  इसकी सहायता से ध्वनि ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है इसकी सहायता से ध्वनि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जाता है माइक्रोफोन का सिद्धांत विद्युत चुंबकीय प्रेरण पर आधारित होता है इसमें धात के दो प्लेटों के मध्य कार्बन के दाने रखे होते हैं इन प्लेटों में एक प्लेट स्थिर तथा दूसरी प्लेट गतिशील होती है। इसे डायाफ्राम कहते हैं जब कोई वक्ता बोलता है तो डायाफ्राम कंपन करने लगता है डायाफ्राम के साथ एक कुंडली जुड़ी रहती है ।जो एक चुंबकीय क्षेत्र में रखी होती है। तथा डायाफ्राम के साथ-साथ कंपन करती है इस कारण इनमें एक विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है इस विद्युत वाहक बल का मान उच्चायी ट्रांसफार्मर की सहायता से बढ़ा दिया जाता है यह विद्युत ऊर्जा जब एक दूसरे स्थान पर पहुंचती है तो लाउडस्पीकर या  टेलीफोन अभीग्राही के द्वारा पुनः ध्वनि ऊर्जा में परिवर्तित कर दिया जाता है ।

 लाउडस्पीकर-

                  इसकी सहायता से माइक्रोफोन द्वारा प्रेषित विद्युत तरंगों को पुनः ध्वनि तरंगों में परिवर्तित किया जाता है इसमें एक कुंडली होती है जो एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र में रखी होती है तथा एक शंक्वाकार कागज़ या धातु के बेलन से जुड़ी होती है जिसे डायाफ्राम कहते हैं ।जब माइक्रोफोन से प्रेषित कुंडली से प्रवाहित होती है तो यह चुंबकीय क्षेत्र में कंपन करने लगता है डायाफ्राम का आकार काफी बड़ा होता है आता है इसके कंपन से बड़े आयाम के कंपन उत्पन्न होते हैं जिससे तीव्र ध्वनि उत्पन्न होती है।

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