प्रकाश में डॉप्लर प्रभाव-

प्रकाश तरंगे भी डॉप्लर प्रभाव दर्शाती हैं ध्वनि में डॉप्लर प्रभाव असिमित होता है जबकि प्रकाश में डॉप्लर प्रभाव सममित होता है इसका तात्पर्य है कि ध्वनि में डॉप्लर प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि ध्वनि स्रोत श्रोता की ओर आ रहा है या उससे दूर जा रहा है इसके विपरीत प्रकाश में डॉप्लर प्रभाव केवल प्रकाश स्रोत व दर्शक के बीच आपेक्षिक वेग पर निर्भर करता है इस बात पर निर्भर करता है कि स्त्रोत दर्शक के निकट आ रहा है या उससे दूर जा रहा है प्रकाश के डॉप्लर प्रभाव द्वारा दूर स्थित तारों व गैलेक्सियों के पृथ्वी के सापेक्ष वेग तथा उनकी गति की दिशा ज्ञात की जाती है ।खगोल विज्ञानी एडविन हबल ने डाप्लर प्रभाव द्वारा यह ज्ञात किया कि विश्व का विस्तार हो रहा है और तारे के प्रकाश के वर्ण क्रम का अध्ययन करके प्रकाश की आवृत्ति में हुए परिवर्तन का पता लगाया जाता है यदि कोई तारा या गैलेक्सी पृथ्वी की ओर आ रहा है तो उसे प्राप्त प्रकाश का तरंग दैर्ध्य स्पेक्ट्रम के बैंगन इसे रेखीय और विस्थापित होता है और यदि गैलेक्सी पृथ्वी से दूर जा रहा है तो प्राप्त प्रकाश का तरंग दर्द स्पेक्ट्रम के लाल सिरे की और विस्थापित होता है अर्थात यदि स्पेक्ट्रम में प्रकाश रेखा बैंगनी रेकी और विस्थापित होती है तो प्रकाश स्रोत तारा गैलेक्सी पृथ्वी की ओर आ रहा है और यदि वह लाल सिरे की और विस्थापित हो रहा है तो प्रकाश स्रोत तारा गैलेक्सी पृथ्वी से दूर जा रहा है।
Posted on by