- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 मई 2019 को दूसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार देश की बागडोर संभाल ली।
- महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रधानमंत्री मोदी साथ ही उनके मंत्रिमंडल के 57 सहयोगियों को भी पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत जिन मंत्रियों ने शपथ ली, उनमें 38 चेहरे मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के ही है।
- मोदी कैबिनेट में कुल 25 मंत्री हैं।
- स्वतंत्र प्रभार वाले 9 मंत्रियों में 8 चेहरे पुराने हैं।
- राज्य मंत्रियों में सबसे ज्यादा नए चेहरे हैं। 24 राज्यमंत्रियों में 13 को पहली बार मंत्रिमंडल में जगह मिली हैं।
भारत के केन्द्रीय मंत्रियों की श्रेणी:
भारत के मंत्रियों की तीन श्रेणियाँ हैं, जो रैंक के अवरोही क्रम इस प्रकार हैं –
- कैबिनेट मंत्री: कैबिनेट के सदस्य; मंत्रालय का नेतृत्व करने वाले।
- राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार): कनिष्ठ मंत्री जो कैबिनेट मंत्री को रिपोर्ट नहीं करते हैं।
- राज्य मंत्री: कनिष्ठ मंत्री जो कैबिनेट मंत्री को रिपोर्ट करते हैं; आमतौर पर उसी मंत्रालय में एक विशेष जिम्मेदारी सौंपी जाती हैं।
केंद्रीय मंत्री, एक नजर-
राजनाथ सिंह ( केंद्रीय मंत्री)
भौतिकी के प्रोफेसर से देश के गृहमंत्री तक का लंबा सफर तय करने वाले राजनाथ सिंह भारतीय जनता पार्टी के ऐसे मजबूत स्तंभ हैं जिनकी पहचान कुशल प्रशासक और राजनीतिक शुचिता का सम्मान करने वाले परिपक्व नेता के रूप में होती है. राजनाथ सिंह ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली. वह इससे पहले मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में गृह मंत्री थे.
अमित शाह( केंद्रीय मंत्री)
शतरंज खेलने, क्रिकेट देखने एवं संगीत में गहरी रुचि रखने वाले भाजपा के ‘चाणक्य’ अमित शाह ने राज्य दर राज्य भाजपा की सफलता की गाथा लिखते हुए इस बार लोकसभा में पार्टी के सदस्यों की संख्या 303 करने में महती भूमिका निभाई है.
अमित शाह ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल कैबिनेट मंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली. वर्तमान लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और दक्षिण भारत में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन के लिए भाजपा अध्यक्ष शाह की सफल रणनीति को श्रेय दे रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि विचारधारा की दृढ़ता, असीमित कल्पनाशीलता और वास्तविक राजनीतिक लचीलेपन का शानदार समन्वय कर शाह ने चुनावी समर में भाजपा की शानदार जीत का मार्ग प्रशस्त किया.
नितिन गडकरी ( केंद्रीय मंत्री)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली सरकार में सबसे ज्यादा कर्मठ मंत्री की पहचान बनाने वाले नितिन गडकरी एक बार फिर मोदी सरकार में मंत्री हैं. सड़क निर्माण में अगर मोदी सरकार की वाहवाही होती है तो इसका बड़ा कारण नितिन गडकरी का बुनियादी ढांचे पर किए गए काम हैं.
निर्मला सीतारमन( केंद्रीय मंत्री)
पिछली मोदी सरकार में निर्मला सीतारमन राज्य मंत्री के रूप में आई थीं लेकिन जल्द ही उनकी तरक्की हुई और वो ना सिर्फ कैबिनेट मंत्री बनीं बल्कि वो भी रक्षा मंत्री. रक्षा मंत्री के रूप में राफेल रक्षा सौदे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के हमले का संसद से सड़क तक करारा जवाब दिया. मोदी सरकार की वापसी हुई है तो निर्मला फिर से कैबिनेट मंत्री बनीं.
एस जयशंकर ( केंद्रीय मंत्री)
डिप्लोमेट से राजनेता बने एस जयशंकर पहली बार में ही सीधे कैबिनेट मंत्री बन गए हैं. डोकलाम विवाद से लेकर संयुक्त राष्ट्र में भारत की पैरवी तक एस जयशंकर की जबरदस्त भूमिका रही है. जयशंकर और नरेंद्र मोदी की जान-पहचान उनके पीएम बनने से पहले की है.
2012 में जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में चीन के दौरे पर थे उसी दौरान जयशंकर उनसे मिले थे. दोनों के बीच कुछ ऐसी बातें हुई कि मोदी जयशंकर के मुरीद हो गए. 2015 की जनवरी में विदेश सचिव की कुर्सी से सुजाता सिंह की विदाई. इसके तुरंत बाद पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की एक बैठक में एस जयशंकर को विदेश सचिव बनाने का फैसला लिया गया था. जयशंकर उन राजनयिकों में से हैं, जिन्हें चीन, अमेरिका और रूस तीनों ही मुल्कों में काम करने का अनुभव है.
स्मृति ईरानी( केंद्रीय मंत्री)
पहली बार जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली तो उनके मंत्रियों में सबसे चौंकाने वाला नाम स्मृति ईरानी का था जो उस वक्त अमेठी में राहुल गांधी से चुनाव हारकर आईं थीं, लेकिन सरकार में ना सिर्फ वो कैबिनेट मंत्री बनीं बल्कि सीधे मानव संसाधन विकास मंत्रालय का जिम्मा मिला. अबकी बार तो राहुल गांधी को हराकर वो सुर्खियों के शिखर पर आ चुकी हैं और एक बार फिर कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली है.
नरेंद्र तोमर( केंद्रीय मंत्री)
मध्य प्रदेश में भाजपा के प्रमुख नेता नरेन्द्र सिंह तोमर को गुरुवार को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में लगातार दूसरी दफा शामिल किया गया है. वर्ष 2014 में ग्वालियर से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद तोमर ने केन्द्र की राजनीति में लम्बा रास्ता तय कर लिया है.
वर्ष 2014 में वह ग्वालियर लोकसभा सीट से सांसद बने और केन्द्र सरकार में कैबिनेट स्तर के मंत्री बनाये गये. उन्होंने कैबिनेट मंत्री के तौर पर खनन, इस्पात, श्रम, रोजगार और ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज जैसे मंत्रालयों का दायित्व संभाला. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें मुरैना भेजा गया और यहां 1.13 लाख मतों के अंतर से विजय हासिल की.
रविशंकर प्रसाद ( केंद्रीय मंत्री)
पिछली बार जब रविशंकर प्रसाद कानून मंत्री बने तो वे राज्यसभा के सांसद थे. लेकिन इस बार पटना साहिब में शत्रुघ्न सिन्हा को खामोश करके जैसी जीत हासिल की, उसके बाद उनका मंत्री बनना तय माना जा रहा था और वही हुआ. रविशंकर प्रसाद ने मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में 26 मई 2014 को संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के रूप में नियुक्त होने के बाद से भारत के दूरसंचार क्षेत्र को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाई.
पीयूष गोयल( केंद्रीय मंत्री)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली सरकार में पीयूष गोयल की एंट्री भी राज्यमंत्री के रूप में ही हुई थी लेकिन जल्द ही उनकी तरक्की हो गई थी और वो रेल मंत्री बन गए थे. बीच में अरुण जेटली की बीमारी के साए में ये चर्चा भी तेज हो गई कि गोयल ही वित्त मंत्री बनेंगे. वित्त मंत्री तो नहीं बने लेकिन जेटली की बीमारी के दौरान बजट पेश किया था.
धर्मेंद्र प्रधान( केंद्रीय मंत्री)
धर्मेंद्र प्रधान पिछली मोदी सरकार में राज्य मंत्री के रूप में ही आए लेकिन जल्द ही उनका भी प्रमोशन हुआ और वो पेट्रोलियम मंत्री बन गए. मंत्री के रूप में इनके दौर मे शुरू किया गया उज्ज्वाल गैस कार्यक्रम गरीब तबकों को बीजेपी की तरफ खींचने में कारगर साबित हुआ. साथ ही ओडिशा में बीजेपी को मिली जीत के पीछे भी इनका बड़ा हाथ माना जाता है. तो अबकी बार फिर धर्मेंद्र प्रधान मोदी सरकार में शामिल हो चुके हैं.
प्रकाश जावड़ेकर( केंद्रीय मंत्री)
पिछली सरकार में प्रकाश जावड़ेकर भी जूनियर मंत्री के रूप में ही आए लेकिन बीच में ही तरक्की पाकर मानव संसाधन विकास मंत्री बन गए. राज्यसभा से आने वाले जावड़ेकर की दोबारा ताजपोशी बताती है कि प्रधानमंत्री उनपर कितना भरोसा करते हैं.
अर्जुन मुंडा( केंद्रीय मंत्री)
इन्हें झारखंड में मिली शानदार जीत का इनाम मिला है. अर्जुन मुंडा प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे. अर्जुन मुंडा खूंटी लोकसभा सीट से जीतकर आए हैं. वह पहली बार केंद्रीय मंत्री बन रहे हैं. झारखंड आंदोलन से सियासी सफर शुरु करने वाले अर्जुन मुंडा के जरिए झारखंड में बीजेपी आदिवासी रुख को अपने साथ जोड़े रखना चाहती है.
रमेश पोखरियाल निशंक( केंद्रीय मंत्री)
उत्तराखंड में बीजेपी ने पांच सीटें जीती तो उसका इनाम राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को मिला है. उत्तराखंड के हरिद्वार सीट से जीते निशंक के लिए मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री का द्वार खुल गया.
प्रहलाद जोशी( केंद्रीय मंत्री)
कर्नाटक के धारवाड़ सीट से लगातार चौथी बार सांसद बने प्रह्लाद जोशी आरएसएस के बेहद करीबी माने जाते हैं. कर्नाटक बीजेपी के लिए दक्षिण में विजयद्वार है. इसीलिए जोशी का कैबिनेट मंत्री के रूप में ताजपोशी चुनावी गणित को साधने वाला भी हो सकता है.
जोशी ने भगवा दल के गढ़ कहे जाने वाले धारवाड़ इलाके से चौथी बार जीत हासिल की. भाजपा की कर्नाटक इकाई के प्रदेशाध्यक्ष जोशी उस समय चर्चा में आये थे जब पार्टी ने हुबली के ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने को लेकर आंदोलन चलाया था. उन्हें 1990 की शुरूआत में कश्मीर बचाओ आंदोलन से भी खासी पहचान मिली.
उन्होंने पहली बार 2004 में संसदीय चुनाव जीता और उसके बाद 2009, 2014 और 2019 में लगातार चुनाव जीतने में सफल रहे। वह भाजपा की कर्नाटक इकाई के महासचिव रहे और फिर 2013 में वह प्रदेशाध्यक्ष बने.