हरदीप पुरी- राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
हरदीप पुरी उन लोगों में हैं जिनपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जबरदस्त भरोसा करते हैं. कहां कैसे योजना बनाई जानी है, उन्हें कैसे जमीन पर उतारना है, और कैसे जनता तक उसका लाभ पहुंचाना है ये हरदीप पुरी बहुत अच्छी तरह समझते हैं. भारतीय विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी हरदीप सिंह पुरी को मोदी सरकार में दूसरी बार मंत्री बनाया गया है. पिछली सरकार में पुरी आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे.
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के लिये भी उन्होंने गुरुवार को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण की. पुरी को हर बेघर को आवास मुहैया कराने, स्मार्ट सिटी परियोजना और शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान जैसी मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को कामयाबीपूर्वक आगे बढ़ाने के पुरस्कार स्वरूप दोबारा मंत्रिमंडल में जगह दी गयी है. मोदी सरकार में 2017 में शामिल किये गये पुरी उत्तर प्रदेश से राज्य सभा सदस्य हैं. पुरी को लोकसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पंजाब के अमृतसर संसदीय क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा गया लेकिन वह चुनाव जीतने में कामयाब नहीं हुये.
प्रह्लाद पटेल- राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
प्रहलाद पटेल स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्यमंत्री बनाए गए हैं. मध्य प्रदेश के दमोह से जीते प्रह्लाद पटेल ने 15 साल पहले नर्मदा यात्रा की थी.
संतोष गंगवार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
शपथ ग्रहण समारोह में बरेली से सांसद संतोष गंगवार ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली. मोदी सरकार में गंगवार को दोबारा मौका मिला है और इससे पहले भी वह मंत्री रह चुके हैं. 2014 के बाद संतोष गंगवार को मोदी सरकार में वित्त राज्य मंत्री का प्रभार दिया गया था. इसके बाद मंत्री परिषद में जब फेरबदल हुआ था तब उन्हें कपड़ा राज्य मंत्री का पद सौंपा गया था.
श्रीपद नाईक- राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
श्रीपद नाइक गोवा बीजेपी का बड़ा चेहरा हैं. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में भी नाइक केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री बनाए गए थे, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल फेरबदल के तहत उन्हें नवगठित आयुष मंत्रालय का केंद्रीय राज्यमंत्री का स्वतंत्र प्रभार दिया गया.वह उत्तरी गोवा लोकसभा सीट से जीतकर संसद पहुंचे हैं.
डॉ. जितेंद्र सिंह- राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
जितेंद्र सिंह ने अपने पूरे करियर में कई भूमिकाएं निभाई हैं. डॉक्टर के तौर पर उन्होंने मरीजों का इलाज भी किया है और केंद्रीय मंत्री के तौर पर नौकरशाही को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी को बखूबी अंजाम दिया. राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में सिंह की क्षमता को मान्यता उस वक्त मिली जब उन्होंने जम्मू-कश्मीर में राज्य स्तरीय राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा.
साल 2014 में नरेंद्र मोदी ने जब पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी तो सिंह को राज्य मंत्री बनाया गया और फिर उन्हें सबसे ताकतवर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्य मंत्री का पद दिया गया. वह जम्मू-कश्मीर की उधमपुर लोकसभा सीट से दूसरी बार सांसद चुने गए हैं। उन्होंने कांग्रेस के विक्रमादित्य सिंह को हालिया लोकसभा चुनावों में 3.57 लाख से ज्यादा वोटों से पराजित किया. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के तौर पर शपथ दिलाई.
किरण रिजिजू- राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
किरण रिजिजू को बीजेपी का कद्दावर नेता माना जाता है. रिजिजू बीजेपी के उन नेताओं में हैं जिन्होंने नॉर्थ ईस्ट में भारतीय जनता पार्टी का सूखा खत्म किया और पार्टी को सीट दिलाई. दिल्ली से ग्रेजुएशन और कानून की पढ़ाई करने वाले रिजिजू नॉर्थ ईस्ट के एकीकरण के पक्ष में रहे हैं.
उनकी दृढ़ सोच रही है कि नॉर्थ ईस्ट के लोग भी उतने ही भारतीय हैं जितने देश के दूसरे लोग. यह देश के लोगों को भी समझना होगा और नॉर्थ ईस्ट के लोगों को भी. 2014 में अरुणाचल से सांसद चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें गृह राज्यमंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी. किरण रिजिजू ने दिल्ली एनसीआर में नॉर्थ ईस्ट के लोगों के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ भी मजबूत आवाज उठाई है. 2014 में सरकार में शामिल होने के बाद उन्होंने नॉर्थ ईस्ट के लोगों से जुड़ी समस्याओं पर सुझाव देने के लिए बेजबरुआ कमेटी बनाई.
आरके सिंह- राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
आरा से दूसरी बार लोकसभा सदस्य चुने गये आर के सिंह को नई मोदी सरकार में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में शामिल किया गया. भाजपा नीत राजग की पिछली सरकार में बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री रहे सिंह की सभी घरों को बिजली पहुंचाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना और चुनाव के नजरिये से महत्वपूर्ण सौभाग्य योजना के क्रियान्वयन में अहम भूमिका रही.
वह गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव और सचिव रहे. उन्होंने पुलिस को आधुनिक रूप देने की योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी तथा जेल के आधुनिकीकरण की शुरूआत की. सिंह ने आपदा प्रबंधन की रूपरेखा रखने में भी अहम भूमिका अदा की. उन्होंने एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) की भी शुरूआत की. वह बिहार में 2006 से 2009 के दौरान पथ निर्माण विभाग में प्रधान सचिव रहे और राज्य के सड़क नेटवर्क को देश के बेहतरीन सड़क नेटवर्क में तब्दील करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.
मनसुख मांडविया- राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
मनसुख मांडविया वही नेता हैं जिन्हें संसद में साइकिल से जाने के लिए जाना जाता है. इस बार उन्हें दोबारा मंत्री बनाया गया है. मांडविया ने साइकिल से शपथ ग्रहण में जाने के बारे में कहा, 'मेरे लिए साइकिल पर शपथ ग्रहण में जाना कोई फैशन नहीं है बल्कि यह मेरा पैशन है. मैं संसद में हमेशा साइकिल पर सवार होकर जाता रहा हूं. यह पर्यावरण के हित में है. इससे ईंधन की बचत होती है और इससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है.' पीएम मोदी के पिछले मंत्रीमंडल में उनके पास शिपिंग और रसायन और उर्वरक मंत्रालय था.