भारत के कैबिनेट मंत्रियों की सूची 2019 (अपडेट) : राज्य मंत्री

अनुराग ठाकुर(राज्य मंत्री)

हिमाचल प्रदेश ने भी बीजेपी पर इस चुनाव में अपनी दरियादिली दिखाई. इसका पुरस्कार हमीरपुर से लगातार चौथी बार जीते अनुराग ठाकुर को मिला जो पहली बार राज्यमंत्री के रूप में मोदी सरकार में शामिल हो गए.

नित्यानंद राय(राज्य मंत्री)

बिहार के उजियारपुर से आने वाले नित्यानंद राय पहली बार मंत्री बने हैं. बिहार में अगर एनडीए ने अद्भुत जीत हासिल की है तो इसमें राय की अहम भूमिका है.

फग्गन सिंह कुलस्ते- राज्य मंत्री

फग्गन सिंह कुलस्ते मध्य प्रदेश की मंडला लोकसभा सीट से छठी बार जीते हैं. कुलस्ते को इस बार फि‍र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में जगह मिली है. वे पहले भी केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं.

कुलस्‍ते पार्टी का सबसे बड़ा आदिवासी चेहरा माने जाते हैं. कुलस्ते का विवादों से भी नाता रहा है. कुलस्ते ने ही संसद में नोंटों का बंडल लहराया था. मंडला चुनाव में कुलस्ते ने कांग्रेस के कमल मरावी को 97 हजार से ज्यादा वोटों से हराया.

अश्विनी चौबे- राज्य मंत्री

अश्विनी कुमार चौबे बक्सर से सांसद हैं. वह चौब मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री रहे हैं. उनहें स्‍वास्‍थ्‍य राज्‍य मंत्री की जिम्‍मेदारी दी गई थी. इस चुनाव में लगातार दूसरी बार बक्सर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए चौबे पांच बार भागलपुर का विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. 

अर्जुन राम मेघवाल- राज्य मंत्री

अर्जुन राम मेघवाल राजस्थान की बीकानेर लोकसभा सीट से जीतकर सांसद बने हैं. उनकी ये लगातार तीसरी जीत है. राजनीति में आने के लिए मेघवाल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से स्वैच्छिक त्याग किया था. पहली बार वह लोकसभा चुनाव 2009 में बीकानेर लोकसभा सीट से जीते और संसद पहुंचे.

साल लोकसभा चुनाव 2014 में भी उन्हें फिर बीजेपी के प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल हुई थी. अर्जुन राम मेघवाल को साल 2016 में वित्त राज्य मंत्री बनाया गया था. जल संसाधन राज्य मंत्री के रूप में भी उनका कार्यकाल रहा.

जनरल वीके सिंह- राज्य मंत्री

पूर्व सेना प्रमुख जनरल विजय कुमार सिंह को बीजेपी ने दूसरी बार गाजियाबाद लोकसभा सीट से मैदान में उतारा था. लोकसभा चुनाव 2019 में जीतने के बाद वीके सिंह को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भी मंत्रीमंडल में जगह मिली. वह मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में विदेश राज्य मंत्री का पद संभाल चुके हैं.

कृष्णपाल गुर्जर- राज्य मंत्री

कृष्ण पाल गुर्जर हरियाणा की फरीदाबाद सीट से सांसद हैं. उन्होंने राज्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली. इससे पहले भी वे मोदी सरकार में मंत्री थे. गुर्जर लगातार दूसरी बार केंद्र सरकार में मंत्री बनाए गए हैं.

दानवे रावसाहेब दादाराव- राज्य मंत्री

दानवे रावसाहेब दादाराव महाराष्ट्र की जालना लोकसभा सीट से सांसद हैं. इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस पार्टी के औताडे विलास केशवराव को 332815 वोटों के अंतर से धूल चटाई. इससे पहले साल 2014 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की जालना लोकसभा सीट से बीजेपी के दानवे रावसाहेब ने कांग्रेस के औताड़े विलास केशवराव को हराया था.

जी कृष्ण रेड्डी- राज्य मंत्री

ये पहली बार सांसद बने हैं. इनको तेलंगाना में बीजेपी को मजबूत करने का ईनाम मिला है. पार्टी ने मंत्रिपरिषद में शामिल करके किशन रेड्डी को ईनाम दिया है.

पुरुषोत्तम रुपाला- राज्य मंत्री

पुरुषोत्तम रुपाला गुजरात के उन राजनेताओं में से हैं जिनके सामने नरेंद्र मोदी ने सियासत शुरू की. 1992 में जिस समय नरेंद्र मोदी विद्यार्थी परिषद का संगठन देख रहे थे उस समय रुपाला सूबे की बीजेपी में सचिव पद पर हुआ करते थे. केशुभाई पटेल और नरेंद्र मोदी के झगड़े के समय रुपाला केशुभाई खेमे के करीबी माने जाते थे. लेकिन 2002 में वो हवा का रुख भांपते हुए नरेंद्र मोदी के पक्ष में खड़े हो गए.

2006 में प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष भी बने.2014 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात छोड़कर दिल्ली आ रहे थे तो गुजरात में उनके वारिस पर काफी तकरार चल रही थीं. उस समय पटेलों के तीन बड़े नेता आनंदीबेन, नितिन पटेल और पुरुषोत्तम रुपाला अपनी तरफ से जोर लगाए हुए थे. नितिन पटेल और पुरुषोत्तम रुपाला को इस मुकाबले में मायूस होना पड़ा.

कहा जाता है कि आनंदीबेन को कमजोर करने के लिए पुरुषोत्तम रुपाला ने गुजरात में पटेल आरक्षण आंदोलन को अंदर ही अंदर मदद पहुंचाई. सौराष्ट्र और खास तौर पर उनका अपना जिला अमरेली इस आंदोलन का गढ़ बना हुआ था. पटेल आंदोलन की वजह से गुजरात में बीजेपी की स्थिति कमजोर लग रही थी. लिहाजा 2016 में पुरुषोत्तम रुपाला को राज्य सभा के जरिए सांसद बनाया गया और केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया.

रामदास अठावले- राज्य मंत्री

नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री रह चुके रामदास अठावले एक बार फिर मंत्री बने हैं. उन्हें मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में राज्यमंत्री का पदभार दिया गया था .उन्होंने मुंबई नार्थ सेंट्रल लोकसभा सीट का तीन बार प्रतिनिधित्व किया है.

साध्वी निरंजन ज्योति- राज्य मंत्री

नरेंद्र मोदी की दूसरी पारी में साध्वी निरंजन ज्योति  को फिर से राज्य मंत्री बनाया गया है. उन्होंने फतेहपुर संसदीय सीट से जीत हासिल की. उन्होंने  गठबंधन उम्मीदवार बसपा के सुखदेव प्रसाद वर्मा को हराया था. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वो केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री थीं. साध्वी निरंजन ज्योति मूलत: कथावाचक हैं. साध्वी निरंजन ज्योति 2014 में उत्तर प्रदेश की फतेहपुर सीट से जीतकर पहली बार सांसद बनी थीं. इससे पहले वे फतेहपुर से ही 2012 में विधायक चुनी गई थीं.

बाबुल सुप्रियोराज्य मंत्री

नरेंद्र मोदी मंत्रिपरिषद में गुरुवार को बाबुल सुप्रियो ने लगातार दूसरी बार केंद्रीय मंत्री के तौर पर शपथ ली. उन्हें राज्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई. सुप्रियो पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट से दोबारा चुने गए. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में उन्हें नगरीय विकास, आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया. बाद में उन्हें भारी उद्योग मंत्राालय में राज्य मंत्री बनाया गया था.

संजीव बालियान- राज्य मंत्री

मुजफ्फरनगर से दोबारा सांसद बने डॉ. संजीव बालियान को राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह को चुनावी मैदान में हराने का ईनाम मिला है. जाटलैंड कहे जाने वाले मुजफ्फरनगर संसदीय सीट से बालियान दोबारा संसद पहुंचे हैं. मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर डॉ. संजीव बालियान लगातार दूसरी बार जीतने वाले तीसरे सांसद बन गए हैं. इससे पहले कांग्रेस के सुमत प्रसाद जैन और भाजपा के ही सोहनबीर सिंह यहां से लगातार दो बार लोकसभा चुनाव जीते थे.

संजय धोत्रे- राज्य मंत्री

संजय धोत्रे महाराष्ट्र की अकोला सीट से जीत दर्ज कर सांसद बने हैं. धोत्रे अकोला सीट पर 2004 से लगातार जीत दर्ज करते आए हैं. धोत्रे लोकसभा की कई महत्वपूर्ण कमेटियों का हिस्सा रहे हैं. वह सूचान प्रौद्योगिकी कमेटी, ग्रामीण विकास कमेटी, कमेटी ऑन एस्टिमेट, स्टैंडिंग कमेटी ऑन रेलवे, परामर्शदात्री समिति, कृषि मंत्रालय, के सदस्य रहे हैं.

सुरेश अंगाड़ी चन्नबसप्पा- राज्य मंत्री

कर्नाटक की बेलगाम लोकसभा सीट से जीतकर सुरेश अंगाड़ी आते हैं. चन्नबसप्पा यहां से चौथी बार चुनाव जीते हैं, जिसका इनाम उन्हें मिला है.

रतन लाल कटारिया- राज्य मंत्री

अंबाला से तीसरी बार सांसद बने रतनलाल कटारिया को मंत्रीमंडल में जगह मिली है. कटारिया हरियाणा राज्य मंत्रिमंडल में रह चुके हैं. रतन लाल कटारिया को 1980 में भाजयुमो का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया. इसके बाद वह पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता, प्रदेश मंत्री, अनुसूचित जाति मोर्चा के अखिल भारतीय महामंत्री, भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री तक के सफर के बाद उन्हें जून 2001 से सितंबर 2003 तक भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया.

वी मुरलीधरन- राज्य मंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत राजग सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के तौर पर शपथ लेने वाले वेलमवेल्ली मुरलीधरन को केरल में भाजपा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का श्रेय जाता है. भाजपा के बड़े नेताओं की केरल यात्रा के दौरान मुरलीधरन अक्सर ही दुभाषिया का काम करते हैं. मुरलीधरन ने 1975 में आपातकाल के दौरान अखिल भारतीय विधार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ता के तौर पर अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी. वह केरल में राजनीतिक रूप से संवेदनशील कन्नूर जिले के रहने वाले हैं, जहां अक्सर ही माकपा और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें देखने को मिलती है. महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य मुरलीधरन प्रदेश केरल इकाई के दो बार प्रमुख रह चुके हैं. वह एबीवीपी के अखिल भारतीय महासचिव भी रह चुके हैं.

भाजपा में उनका औपचारिक प्रवेश 1998 के लोकसभा चुनाव के दौरान हुआ था जब उन्हें नयी दिल्ली में भाजपा के केंद्रीय चुनाव नियंत्रण कक्ष में वेंकैया नायडू की सहायता के लिए नियुक्त किया गया था. वर्ष 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनने पर मुरलीधरन को नेहरू युवा केंद्र का उपाध्यक्ष बनाया गया था. वह 2002-04 के दौरान इसके महानिदेशक रहे थे.

रेणुका सिंह सरुता- राज्य मंत्री

सरगुजा से सांसद चुनी गईं रेणुका सिंह प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल हो गई हैं. 2000-03 तक अविभाजित मध्य प्रदेश में भाजपा रामानुजनगर मंडल की पहली महिला अध्यक्ष थीं. जनपद सदस्य निर्वाचित होने के साथ ही समाज कल्याण बोर्ड की सदस्य भी रह चुकी हैं. 2003 और 2008 में प्रेमनगर विधानसभा से विधायक चुनी गईं. रमन सिंह सरकार में महिला बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री रहीं

सोम प्रकाश- राज्य मंत्री

भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी और पंजाब के फगवाड़ा से दो बार विधायक रहे सोम प्रकाश पहली बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में राज्य मंत्री बनाए गए हैं. केंद्र में मंत्री पद की बृहस्पतिवार को शपथ लेने वाले प्रकाश पंजाब में होशियारपुर (सुरक्षित) सीट से निर्वाचित हुए. भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद विजय सांपला का टिकट काट कर पंजाब के दोआब क्षेत्र से एक प्रमुख दलित चेहरा प्रकाश को इस सीट से उम्मीदवार बनाया था. प्रकाश ने भाजपा में शामिल होने के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से समय से पहले सेवानिवृत्ति ले ली थी.

रामेश्वर तेली- राज्य मंत्री

असम के डिब्रूगढ़ से बीजेपी सांसद रामेश्वर तेली को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिली है. रामेश्वर तेली ने डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी पवन सिंह घटोवार को हराया था. तेली को 364566 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल हुई थी. रामेश्वर तेली को पहली बार मंत्रिमंडल में जगह मिली है.

प्रताप चंद्र सारंगी- राज्य मंत्री

फूस का घर, आने जाने के लिए साइकिल और पेंशन की राशि को गरीब बच्चों के लिए दे देना. मोदी मंत्रिमंडल में शामिल हुए ओडिशा के सांसद प्रताप सारंगी को अपनी इसी सादगी के लिए जाना जाता है. अब 64 साल के हो चुके प्रताप सारंगी ने कभी साधु बनना चाहा था और वह एकांत जीवन बिताना चाहते थे लेकिन उनका समाज के प्रति समर्पण और जनसेवा का भाव उनको मोदी मंत्रिमंडल में ले आया.

सारंगी लंबे समय तक आरएसएस से जुड़े रहे हैं और इस बार के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बालासोर संसदीय सीट से बीजद प्रत्याशी रबींद्र कुमार जेना को 12,956 मतों से हरा दिया. भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य सारंगी को ओडिशा का मोदी भी कहा जाता है. वह दो बार ओडिशा विधानसभा के लिए चुने जा चुके हैं.

कैलाश चौधरी- राज्य मंत्री

बाड़मेर लोकसभा सीट से एमपी बने कैलाश चौधरी ने गुरुवार को मोदी कैबिनेट में राज्य मंत्री के रुप में शपथ ले ली है. उन्होंने इस चुनाव में बाड़मेर से  कांग्रेस प्रत्याशी मानवेंद्र सिंह को मात दी.

देबोश्री चौधरी- राज्य मंत्री

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जनरल सेक्रेटरी हैं. कोलकाता की रहने वाली हैं. 2014 लोकसभा चुनाव भी इन्होंने लड़ा था, बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा सीट से. लेकिन हार गई थीं. एक बार फिर बीजेपी ने इन्हें टिकट दिया था, इस बार जीत गईं और कैबिनेट में जगह मिल गई.

राव इंद्रजीत सिंह- राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

दक्षिणी हरियाणा में प्रभावी यादव समुदाय के प्रमुख नेता राव इंद्रजीत सिंह को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिपरिषद में जगह दी गई है. सिंह दशकों से दक्षिण हरियाणा की राजनीति में प्रभावी रहे हैं और अब इस क्षेत्र में भाजपा का चेहरा हैं. पांचवीं बार लोकसभा के लिये चुने गए सिंह को यादव समुदाय का खासा समर्थन मिलता रहा है जिसे अहीर के तौर पर भी जाना जाता है.

भाजपा सांसद के तौर पर अपनी गुरुग्राम सीट को दोबारा बरकरार रखते हुए 69 वर्षीय नेता ने इस बार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय सिंह यादव को 3.86 लाख से ज्यादा मतों के अंतर से शिकस्त दी. सिंह 2014 के लोकसभा चुनावों से कुछ महीनों पहले ही कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे. वह तब गुरुग्राम से कांग्रेस के सांसद थे. वह मोदी के नेतृत्व वाली राजग-1 सरकार में भी मंत्री थे.

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