क्रमशः
Day - 39
- संघ-राज्य क्षेत्रों में दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का दर्जा प्रदान किया गया है। संघ-राज्य क्षेत्र दिल्ली तथा पाण्डिचेरी में विधान सभाएं भी हैं।
- संविधान के प्रारम्भ के बाद से उन राज्यों और अन्य राज्य क्षेत्रों में जिनसे मिलकर संघ बना है, बहुत परिवर्तन हो गए। मूल संविधान में राज्यों को तीन प्रवर्गों में बांटा गया था। ये पहली अनुसूची के भाग क, ख और ग में प्रगणित थे। इनकी संख्या क्रमशः 10, 8 और 9 थी। इस प्रकार कुल संख्या 27 थी। इनके प्रशासन में भी कुछ अन्तर था। 1956 तक देशी रियासतों का धीरे-धीरे समामेलन हो गया, तब इन तीन प्रवर्गों को एक में परिवर्तन करके राज्यों की कुल संख्या 16 कर दी गई।
- राज्यों का पुनर्गठन करने के लिए नवम्बर 1947 में संविधान सभा ने ‘न्यायमूर्ति एस.के. दर’ की अध्यक्षता में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसने सुझाव दिया कि राज्यों का पुनर्गठन मात्र भाषा के आधार पर नहीं होना चाहिए।
- इस आयोग की सिफारिशों पर विचार करने के लिए कांग्रेस ने अपने जयपुर अधिवेशन में 1948 में त्रिसदस्यीय समिति जे.वी.पी. समिति गठित की जिसके सदस्य जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल तथा पट्टाभि सीतारमैय्या थे। जे.वी.पी. समिति ने कहा कि राज्यों के पुनर्गठन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका देश की सुरक्षा, एकता एवं आर्थिक समृध्दि की होनी चाहिए।कांग्रेस कार्य समिति ने इसकी सिफारिशें 1949 में स्वीकार कर लीं। कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश राज्य के गठन को तत्कालीन परिस्थितियों में स्वीकार कर लिया। 29 दिसम्बर 1953 के संकल्प द्वारा भारत सरकार ने राज्य पुअनर्गठन आयोग की स्थापना की। इस आयोग के अध्यक्ष सैयद फजल अली थे तथा सदस्य के रूप में ह्र्दयनाथ कुँजरु तथा के.एम. पणिक्कर सम्मिलित थे। आयोग 1955 में भारत सरकार को अपनी रिपोर्ट दी। आयोग ने राज्यों के पुनर्गठन के लिए भाषा के आधार को स्वीकार किया तथा इसके आधार पर राज्यों के निर्माण का सुझाव दिया। तत्कालीन सत्ताइस राज्यों के स्थान पर सोलह राज्य तथा तीन केन्द्र शासित क्षेत्रों के गठन का सुझाव दिया गया। इस आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 बनाया गया।
मिलते है हम अगले दिन, इसी विषय पर फिर आगे चर्चा करने के लिये..