भारतीय संविधान Easy Notes - 42 (संघ और उसका राज्य-क्षेत्र)

क्रमशः - 

Day - 42

नए राज्यों के निर्माण की प्रक्रिया

    संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार संसद को यह अधिकार प्राप्त है कि वह राज्यों, जिसमें संघ राज्य क्षेत्र भी सम्मिलित है, के क्षेत्रों को मिला कर नए राज्यों का निर्माण कर सकती है। संसद सामान्य बहुमत अथवा सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया द्वारा नए राज्य का निर्माण, सीमा परिवर्तन या नाम बदल सकती है, लेकिन इससे पूर्व नये राज्य के निर्माण से सम्बन्धित विधेयक राष्ट्रपति के द्वारा अनुमत प्राप्त होना चाहिए।राष्ट्रपति सम्बन्धित राज्य को विधेयक विचारार्थ भिजवाता है।  राज्य के विधान मण्डल विधेयक पर विचार-विमर्श करके अपने सुझाव सहित निर्धारित अवधी से वापस कर देता है। सुझावों को मानना संसद के लिए आवश्यक नही है। राष्ट्रपति द्वारा विचार-विमर्श की अवधि को बढ़ाया जा सकता है, लेकिन, यदि राज्य इस विधेयक को निर्धारित अवधि में प्रेषित नहीं करता है तो राष्ट्रपति विधेयक को संसद में ऐसे ही प्रस्तुत करवा सकता है। जम्मु-कश्मीर राज्य में इस आशय का विधेयक पारित होना अनिवार्य है।

  • संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को नए राज्य के निर्माण की शक्ति देता हैयह –
    1. किसी राज्य में से उसका राज्यक्षेत्र अलग करके (जैसे पंजाब से हरियाणा, मुम्बई से गुजरात, उत्तर प्रदेश से उत्तराखण्ड, मध्य प्रदेश में छत्तीसगढ़ आदि) या
    2. दो या अधिक राज्यों को या राज्यों के भागों को मिलाकर (जैसे – भोपाल, मध्य भारत और विंध्य प्रदेश को मिलाकर मध्य प्रदेश बना, अजमेर का राजस्थान में विलय हुआ, आदि) किया जा सकता है।
  • संघ-राज्य क्षेत्र अर्थात् केन्द्रशासित प्रदेश राज्य नहीं है। अतएव उसमें परिवर्तन के लिए निर्देश की आवश्यकता नहीं होती।

मिलते है हम अगले दिन, नए राज्यों के निर्माण  विषय पर फिर आगे  चर्चा करने के लिये..

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