कानून व्यवस्था प्रशासन अवधारणा - अर्थ परिभाषा विशेषताएँ

भारतीय संविधान के भाग - 3 के अर्न्तगत जहाँ कानून के शासन को मान्यता देते हुऐ..................................

नागरिको के अधिकारो को संरक्षित करने पर बल दिया गया है जिससे कानुन व्यवस्था के संर्क्षण के दायित्व ‘‘राज्य’’ पद आता है। इसी प्रकार सांतवी अनुसूची में तीनो सूचियो में इसके सम्बन्ध में केन्द्र एंव राज्य के दायित्व को सुनिश्चित किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि संविधान निर्माताओ द्वारा भी कानून व्यवस्था को सर्वोच्च वरीयता दी गयी है।

            संविधान के भाग - 3 के अर्न्तगत Art-14 जहाँ विधि के शासन को प्रत्यक्षिता परिवर्तित करता है. और विधि के समझ समानता एवं विधियो के समान्य सरंक्षण पर बल देता है। जिसके तहत सरकार द्वारा किये जाने वाले समस्त कार्य विधि सम्मत होते है। तथा निर्धारित कानून के अनुसार ही दंड दिये जाने व्यायिक निर्णयो को सर्वोच्चता प्रदान करने तथा प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा उपलब्ध कराना जिससे कि सभी नागरिक न्यायालयो तक अपनी पहुँच बनाये रखे। इससे कानून की शासन की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा।

            इसी प्रकार Art-15 जहाँ राज्य को निर्देश देता है कि वह किसी भी व्यक्ति के साथ धर्म,जाति,मूलवंश व लिंग के आधार पर विभेद नहीं करेगा वही Art-16 लोक नियोजन में अवसर की समानता प्राप्त करायेगा।

            Art-19 नागरिको के मौलिक अधिकारो की स्वतंत्रता संबंधि अधिकारो के सरंक्षण का दायित्व राज्य को देता है। इस रुप  राज्य द्वारा अपनी वरीयताओ में नागरिक स्वतंत्रताओं को सर्वोच्च मानते हुए कानून व्यवस्था का सरंक्षण करती है इसी प्रकार इन स्वतंत्राओ को पुलिस व सैन्य अधिकारियो के सबंधं मे निर्बन्धन भी आरोपित किया गया है । इसी प्रकार Art-20 एंव 21 में भी मौलिक अधिकारो को संरक्षित करते हुए वैयतिक अधिकारो को वरीयता दी गयी है।

            भारतीय संविधान की सांतवी अनुसूची कानून व्यवस्था के निर्धारण में केन्द्र एंव राज्य के दायित्व को सुनिश्चित करती है। जहाँ..................

1- सूची- I - केन्द्रीय सूची के अन्तर्गत कानून व्यवस्था के सदंर्भ में संघ सरकार को कुछ विशेष अधिकार प्रत्यायोजित किये गये है जिसकी प्रविष्टी - 2(A) में कहां गया है कि संघ सरकार भारतीय संघ में किसी भी राज्य में यदि कानून व्यवस्था बिगड़ती है। तब वह संसत् बलो की तैनाती कर सकता है। इस रुप में केन्द्र सरकार के गृहमत्रांलय के अन्तर्गत संगठित आन्तरिक सुरक्षा विभाग के अधीन विभिन्न प्रकार के केन्द्रीय अर्धसैनिक बल गठित किये गये है।

            सूची - I की प्रविष्टी - 9 के अन्तर्गत सघं सरकार को यह अधिकार दिया गया है। कि वह निवारक निरोध कानूनो का निर्माण करे जिसके तहत स्वतंत्रत्योतर अब तक विभिन्न प्रकार के निवारक निरोध कानून जैसे- रासुका, मिशा, टाडा ,पोटा आदि लाये गये है।

सूची-II - यह सूची राज्य सरकार को कानून से जोड़ती है, जहाँ प्रविष्टी - 1 लोक व्यवस्था का विषय राज्य के अधिकार क्षेत्र में शामिल करती है। वही प्रविष्टी- 2 राज्य के लोक व्यवस्था को बनाये रखने के लिए पुलिस बल के गठन का अधिकार राज्य को दिया गया है। इस प्रकार पुलिस राज्य का विषय है। जिसके तहत राज्यो द्वारा आरक्षित एवं पुलिस,बलो का गठन किया है जिसमें रेलवे पुलिस,ग्रामीण पुलिस आदि आती है। इसी प्रकार प्रविष्टी - 4 राज्यो को कारागार सुरक्षा व निरक्षण का दायित्व देती है और कारागार पुलिस का प्रावधान करती है।

सूची III - यह सूची संघ एवं राज्य दोनों ही सरकारों को कुछ आपराधिक दंड प्रक्रियाओं के सबंधं में समान अधिकार प्रदान करती है. जिसके तहत प्रविष्टी -1 संघ राज्य सरकारो को भारतीय दंड संहिता में संसोधन का समान अधिकार शामिल करती है। जबकि प्रविष्टी -2 दोनों ही सरकारों को अपराधिक प्रक्रियाओ के संहित संसोधन का अधिकार देती है। जिसके तहत समय-समय पर केन्द्र एंव राज्य सरकारो द्वारा इसमें संसोधन किये गये है।

                  इस प्रकार से स्पष्ट है कि भारतीय संविधान द्वारा कानून व्यवस्था प्रशासन को सर्वोच्च वरीयता प्रदान की गयी है। जिसके तहत नागरिक अधिकारो का संरक्षण होता है तथा देश में विकास का एक बेहतर मौहोल सृजित होता है।

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