By D.P. PANDEY
कानून व्यवस्था एवं विकास में प्रत्यक्ष सबंधं है। जिसके तहत यदि कानून व्यवस्था बेहतर होती है तो विकास की सार्लभौमिक प्रक्रिया जन्म लेती है। जिससे जडनसमुदाय का व्यापक कल्याण सुनिश्चित होता है। इसीलिए 21वीं शताब्दी में विकास के परिवर्तित मानको अर्थात् सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक विकास के साथ अब सतत् , जिकाऊई, समपोषणीय, समोवशी व पर्यावरणीय विकास को प्रभावी बनाये रखथने के लिए कानबन व्यवस्था प्रशासन को आधुनिकीकृत करते हुए प्रभावी बनाये जाने की अपेक्षा की जा कही है। इसीलिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इस दिशा में विभिन्न देशो कते मध्य परस्पर संधिया व समझौते हो रहे है विशेष तौर पर आतंकवाद को समाप्त करने के सबंधं में।
जहाँ विकास के अर्न्तगत शिक्षा रोजगार और औद्योगिक विकास, तकनीकी विकास आदि को बढ़ाये जाने के सबंधं मे पूँजी निवेश की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है किन्तु निवेशको द्वारा उन देशो व क्षेत्रों में जहाँ उनके निवेश को पर्याप्त सुरक्षा प्राप्त होती है। कानून व्यवस्था बनी रहती है। वहाँ निवेश को अधिक परीयता दी जा रही है। जिससे पूँजी निवेश को बढ़ाने के सदंर्भ मे कानून व्यवस्था का सरंक्षण अपरिहार्य हो गया है।
कानून व्यवस्था प्रशासन के बेहरत होने से ही विकास का जहाँ बेहतर वातावरण सृजित होगा वही स्वय पुलिस प्रशासन में भी आधिनिकीकरण करने गुणवत्ता का विकास करने एवं नागरिक अधिकारो को सरंक्षण देने की स्थिति प्राप्त होगी। जिससे मानव विकास के लिए भी एक बेहतर स्थिति उत्पन्न हो सकेगी।
कानून व्यवस्था को बेहतर बनये रखने के लिए स्थानीय स्तर पर विकास को बढ़ाने एंव लोगो को प्रशासन के साथ जोड़ते हुए जन सहभागिता लाये जाने पर बल दिया जा रहा है जैसे भारत में नकसलवाद से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति बनायी गयी है प्रभावित राजीय के मध्य शान्ति समझौता के प्रयास किये जा रहे है। और स्थानीय लोगो को हिंसा से दूर रहने और विभिन्न विकास कार्यक्रमो में सहभागी बनते हुए नक्सलवाद के विरुद्ध एक जुट होकर कार्य करने पर बल दिया जा रहा है। वही आतंकवाद निरोधी केन्द्र के गठन को लाये जाने पर बल दिया जा रहा है इससे देश में भय का वातावरण समाप्त होगा तथा विकास का वातावरण सृजित हो सकेगा तथा स्पष्ट है कि कानून व्यवस्था प्रशासन एवं विकास के मध्य घनिष्ट सबंधं है।