हाल ही में जियोफिजिकल रिव्यू लेटर्स नामक पत्रिका में प्रकाशित एक शोध् के अनुसार वैज्ञानिकों ने भूकंप की भविष्यवाणी की एक नवीन तकनीकी विकसित की है। इस तकनीकी के विषय में आप क्या जानते हैं? साथ ही बताइए कि इस तकनीक से भूकंप की आपदा को नियंत्रित करने में किस प्रकार मदद मिलेगी?

हाल ही में एक महत्वपूर्ण शोध्-पत्र प्रकाशित किया गया है जो भूकंप की भविष्यवाणी की नवीन प्रणाली को विकसित करने से संबंधित है। यह रिसर्च पेपर ‘जियोफिजिकल रिव्यू लेटर्स (Geophysical Review) नामक प्रख्यात पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। भूकंप की भविष्यवाणी करने वाली इस तकनीकी को कृत्रिम आसूचना अर्थात् ‘आर्टीफिसियल इंटेलीजेन्स’ (Aritificial Intelligence) का नाम दिया गया है।

भूकम्प की भविष्यवाणी सम्बंधी आर्टीफिसियल इंटेलीजेन्स तकनीकी के विषय में आप क्या जानते हैं?

  • भूकंप की भविष्यवाणी से सम्बंधित इस ‘आर्टीफिसियल इंटेलीजेन्स’ तकनीकी का विकास ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी के शोध् कर्ताओं ने मिलकर किया है।
  • इस तकनीकी के अंतर्गत शोधकर्ता वैज्ञानिकों ने सर्वप्रथम भूकंप से सम्बंधित गुप्त संकेतों का पता लगाया तथा इन संकेतों की सहायता से भूकंप की भविष्यवाणी करने वाली मशीन का निर्माण किया।
  • शोधकर्ता वैज्ञानिकों ने भूकंपों के बीच होने वाली पारस्परिक क्रिया का अध्ययन किया तथा भविष्य में आने वाले संभावित भूकंपों का अनुमान लगाया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने फाल्ट्स (Faults) का भी अध्ययन किया।
  • वैज्ञानिकों के द्वारा अपने समस्त शोध् एवं अध्ययन के लिए प्रयोगशाला आधरित प्रणाली का प्रयोग किया गया जो कि भूकंप की नकल थी।
  • इसके पश्चात् फाल्ट्स से आने वाले संकेतों का विश्लेषण करने के लिए मशीन का प्रयोग किया गया।
  • यह मशीन भूकंप से पहले आने वाली एक विशेष प्रकार की आवाज का पता लगाने में सक्षम है। इस प्रकार ध्वनि पैटर्न के माध्यम से फाल्ट्स  पर पड़ने वाले दबाव का सटीक आकलन किया जा सकता है और समय से पहले भूकंप के बारे में चेतावनी जारी की जा सकती है।

आर्टफिसियल इंटेलीजेन्सनामक यह तकनीकी भूकम्प को नियंत्रित करने में किस प्रकार सहायक होगी?

  • ‘आर्टीफिसियल इंटेलीजेन्स’ नामक तकनीकी के तहत वैज्ञानिकों ने जिस मशीन का निर्माण किया है उसका प्रयोग करके भूकंप आने से पूर्व फाल्ट्स (Faults) पर जो दबाव पड़ता है उसके विषय में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
  • ज्ञातव्य है कि भूकंप हमेशा फाल्ट्स के आस-पास ही आते हैं अतः फाल्ट्स की गतिविधि का अध्ययन करके न सिर्फ भूकंप का पता लगाया जा सकता है बल्कि समय से पूर्व चेतावनी जारी कर जान-माल के नुकसान से भी बचा जा सकता है।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि भूकंप के सम्बंध में विकसित यह नवीनतम तकनीकी अहम है तथा इससे भूकंप सम्बंधी आपदा को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण मदद प्राप्त हो सकती है।

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