स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म सन्1824 में गुजरात के मौरवी में हुआ था।
इनके बचपन का नाम मूलशकर था।
स्वामी पूर्णानंद से २४ वर्ष की आयु में संन्यास की दीछा ली।
इन्होंने ही पुनः वेदों की ओर लौटो का नारा दिया। तथा वेदों को भारत का आधार स्तंभ कहा।
सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक की रचना स्वामी दयानंद सरस्वती ने की थी।
वर्ष १८६१ में मथुरा के स्वामी विराजानंद से इन्होंने वेदों का गहन अध्ययन किया।
इन्होंने ही सर्वप्रथम स्वराज और स्वदेशी शब्द का प्रयोग किया तथा हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार किया।
इनकी मृत्यु अजमेर में१८८३ में हुई थी।
वेलेंटाइन सिरोल ने आर्य समाज को अशांति का जन्मदाता कहा है।