मुहावरा
मुहावरा बात कहने की एक शैली है। यह अरबी भाषा के ‘मुहावरा’ शब्द से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है-‘अभ्यास करना’ या ‘बातचीत’।
जो किसी बोली जाने वाली भाषा में प्रचलित होकर रूढ़ हो गया हो तथा प्रत्यक्ष अर्थ के बजाय सांकेतिक अर्थ देता हो तो मुहावरा कहलाता है। जैसे-खिचड़ी पकाना, लाठी खाना, नाम धरना आदि।
मुहावरों की निम्न विशेषताएँ होती है-
1. मुहावरों का शाब्दिक अर्थ नहीं, बल्कि (सांकेतिक) अवबोधक अर्थ लिया जाता है। जैसे ‘खिचड़ी पकाना’ इसका शाब्दिक अर्थ होगा-खिचड़ी बनाना परन्तु मुहावरे के रूप में सांकेतिक अर्थ होगा-षड्यंत्र करना।
2. मुहावरे का अर्थ प्रसंग के अनुसार होता है, जैसे-‘लड़ाई में खेत जाना’ इसका अर्थ है ‘युद्ध में शहीद हो जाना’ न कि लड़ाई के स्थान पर किसी खेत का चले आना।
3. मुहावरे का मूल रूप कभी नहीं बदलता अर्थात् मुहावरे का स्वरूप स्थिर होता है, अन्यथा मुहावरा नष्ट हो जाता। जैसे ‘कमर टूटना’ एक मुहावरा है इसके स्थान पर ‘कति भंग’ शब्द का प्रयोग नहीं किया जा सकता।
4. हिन्दी के अधिकांश मुहावरों का सीधा संबंध शरीर के विभिन्न अंगों यथा-मुँह, कान, नाक, हाथ, पाँव, आँख, सिर आदि से होता है, जैसे -मुँह की खाना, कान खड़े होना।
5. मुहावरा भाषा की समृद्धि तथा सभ्यता के विकास का मापक होता है।