ट्रांसजेण्डर समुदाय भारतीय समाज का सर्वाधिक वंचित समुदाय रहा है। ट्रांसजेण्डर से तात्पर्य, ऐसे पुरुष या महिला से है जिनका लिंग उनके जन्म के समय निर्धारित लिंग से अलग होता है। इस समुदाय के लोगों को समाज में कई प्रकार के लैंगिक एवं वर्ग संबंधी भेदभावों का सामना करना पड़ता है।
ट्रांसजेण्डर समुदाय को समाज में किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
- ट्रांसजेण्डर समुदाय के लोगों को समाज में घृणित दृष्टि से देखा जाता है तथा उन्हें मौलिक अधिकारों से भी वंचित करने का प्रयास किया जाता है।
- उदाहरण के तौर पर, ट्रांसजेण्डर समुदाय को न ही आम लोगों की तरह व्यक्तिगत स्वतंत्राता का अधिकार मिलता है और न ही उन्हें शिक्षा एवं कौशल विकास के अवसर मिलते हैं।
- ट्रांसजेण्डर समुदाय को आम तौर पर काम पर भी नहीं रखा जाता है जिसके कारण उन्हें आजीविका के लिए भिक्षावृत्ति एवं देह व्यापार का रास्ता अपनाना पड़ता है।
- इस समुदाय को न तो अन्य वंचित वर्गों के समान आरक्षण दिया जाता है और न ही इनके लिए समुचित चिकित्सा सुविधाये ही उपलब्ध् हैं। इसके कारण इस समुदाय के लोगों में एचआईवी (HIV) एवं अन्य गंभीर रोगों का तेजी से प्रसार हो रहा है।
- ट्रांसजेण्डर समुदाय को विवाह, गोद लेने एवं सम्पत्ति के उत्तराधिकार के सम्बन्ध में भी अन्य के समान नागरिक अधिकार नहीं प्रदान किये जाते हैं।
- सबसे बढ़कर स्वयं ट्रांसजेण्डर समुदाय के भीतर ही भारी भेदभाव देखने को मिलता है। उदाहरण के तौर किन्नरों के गुरु अपने शिष्यों को दासता का जीवन जीने को मजबूर करते हैं।
ट्रांसजेण्डर पर्सन (अधिकारों का संरक्षणद्) विधेयक, 2016 में शामिल प्रावधनः
- इस विधेयक में ट्रांसजेण्डर समुदाय के साथ होने वाले सभी प्रकार के भेदभावों का निषेध किया गया है।
- ट्रांसजेण्डर समुदाय से संबंधित व्यक्ति को एक पहचान पत्रा प्रदान किया जायेगा। यह पहचान पत्रा जिलाधिकारी के द्वारा प्रदान किया जाएगा।
- ट्रांसजेण्डर समुदाय को निवास का अधिकार (Right to Reside) प्रदान किया गया है। यदि किसी ट्रांसजेण्डर को उसके घर वाले रखने में असमर्थ होंगे तो उसे सक्षम न्यायालय के आदेश पर किसी पुनर्वास केन्द्र में रखा जाएगा।
- इस विधेयक में ट्रांसजेण्डर समुदाय से सम्बन्धित नीतियों के निर्माण, निगरानी एवं क्रियान्वयन के लिए केन्द्र सरकार को परामर्श देने हेतु राष्ट्रीय ट्रांसजेण्डर परिषद के गठन का प्रावधन किया गया है।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है ट्रांसजेण्डर समुदाय को समाज में अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ट्रांसजेण्डर पर्सन (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक इस समुदाय की स्थिति में सुधार के लिए मील का पत्थर साबित होगा।