नवीन भारत के निर्माण में महिलाओं की समुचित भागीदारी सुनिश्चित किया जाना क्यों आवश्यक है? वैश्विक शोध् रिपोर्टों के निष्कर्षों के आधार पर बताइए कि यदि भारत के कार्यबल में महिलाओं को पुरुषों के बराबर भागीदारी प्रदान कर दी जाये तो अर्थव्यवस्था किस प्रकार से लाभान्वित होगी?

किसी भी देश, राज्य एवं क्षेत्रा का विकास उस देश की उपलब्ध् मानव शक्ति की कार्यक्षमता, सामर्थ्य, गुणवत्ता एवं शिक्षा आदि बातों पर निर्भर करता है। यहाँ एक बात ध्यान में रखना जरूरी है कि महिलायें भी पुरुषों के समान किसी भी राष्ट्र की मानव संसाधन होती हैं। वर्तमान समय में महिलायें न सिर्फ सामाजिक एवं सांस्कृतिक मामलों में बल्कि राजनीतिक एवं आर्थिक मामलों में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है।

नवीन भारत के निर्माण के लिए महिलाओं की समुचित भागीदारी क्यों जरूरी है?

  • अधिकांश देशों विशेषकर विकासशील देशों में महिलायें पुरुषों से अधिक कार्य करती हैं किंतु उनके घरेलू कार्यों को न तो आर्थिक गतिविधियों में शामिल किया जाता है और न ही देश की जीडीपी में अतः यदि नवीन भारत का निर्माण करना है तो महिलाओं के घरेलू योगदान को स्वीकार करना होगा।
  • नवीन भारत के निर्माण के लिए जरूरी है कि महिलाओं के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण को परिवर्तित किया जाये और यह स्थापित सत्य है कि जब तक महिलायें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं बन जाती तब तक उन्हें समाज में बराबरी का दर्जा मिलना कठिन है।
  • महिलाओं की समुचित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सर्वाधिक आवश्यक महत्वपूर्ण तथ्य महिलाओं की शिक्षा है। शिक्षित महिलायें सिर्फ स्वयं ही शिक्षा नहीं प्राप्त करती बल्कि पूरे घर को शिक्षित बनाने में अहम भूमिका अदा करती है।

महिलाओं को पुरुषों के समान भागीदारी देने से अर्थव्यवस्था में आने वाला परिवर्तन

  • विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011 में भारत में कुल श्रमबल में महिलाओं की भागीदारी का प्रतिशत 24.6 था जबकि 2014 में यह प्रतिशत घटकर 24.2 हो गया। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि भारतीय अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाया जाये तो अर्थव्यवस्था में 16 प्रतिशत तक की वृद्धिलायी जा सकती है।
  • लैंगिक समानता पर जारी की गयी अपनी हालिया रिपोर्ट में ‘मैकिंजी ग्लोबल इंस्टीट्यूट’ ने दावा किया है कि यदि भारत में लैंगिक समानता स्थापित हो जाती है तो दुनिया के किसी भी क्षेत्रा की तुलना में भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका सर्वाधिक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  • अर्नेस्ट एवं यंग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर एक शोध् में पाया गया है कि जिन कम्पनियों के नेतृत्व में 30 प्रतिशत भूमिका महिलाओं की होती है उन कम्पनियों के कुल मुनाफे में 6 प्रतिशत की वृद्धिदर्ज की गयी है। यह रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी समान रूप से लागू होती है।
  • मैकिंजी की रिपोर्ट के अनुसार भारत के अधिकांश राज्य लैंगिक असमानता का सामना कर रहे हैं। लैंगिक समानता की सबसे अधिक दर मिजोरम में तथा सबसे कम दर बिहार में पायी गयी है। यदि मिजोरम जैसी स्थिति सभी राज्यों में हो जाये तो अर्थव्यवस्था में आश्चर्यजनक वृद्धि देखी जा सकती है।

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि नवीन भारत के निर्माण के लिए अर्थव्यवस्था में महिलाओं को पुरुषों के समान भागीदारी प्रदान करनी होगी। ज्ञातव्य है कि महिलाओं की समान भागीदारी से आर्थिक विकास की दर को काफी अधिक बढ़ाया जा सकता है।

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