भारत में बाल विवाह पर कानूनी रोक होने के बावजूद इन्हें बड़ी संख्या में आयोजित किया जाता है। आँकड़ों के मुताबिक दुनिया की तकरीबन एक तिहाई बालिका वधुएं भारत में है। बाल विवाह का सबसे बड़ा कारण परम्परागत रूढ़ियाँ एवं मान्यतायें हैं। साथ ही पितृसत्तावादी सोच भी इस कुप्रथा के लिए जिम्मेदार है।
हाल ही में ‘एक्शन्ड इंडिया’ की रिपोर्ट ‘इलीमिनेटिंग चाइल्ड मैरिज इन इंडिया : प्रोग्रेस एण्ड प्रॉस्पेक्ट्स’ (Eliminating Child Marriage in India: Progress and Prospects) के अनुसार, भारत में 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों की संख्या, जिनकी शादी कर दी गई है, 8.52 करोड़ है।
भारतीय दण्ड संहिता की धरा 375 के अपवाद (2) के सम्बंध् में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय बाल विवाह को नियंत्रित करने में कहाँ तक सहायक होगा?
- सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा हालिया निर्णय में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 375 के अपवाद (2) को पुनर्परिभाषित किया गया है तथा स्पष्ट किया गया है कि 18 वर्ष से कम उम्र की पत्नी के साथ शारीरिक सम्बंध् दुष्कर्म की श्रेणी में रखा जायेगा।
- सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय से बाल विवाह के प्रति जागरूकता फैलाने तथा लोगों की मानसिकता को परिवर्तित करने में मदद मिलेगी किन्तु इसकी एक सीमा है।
- दरअसल बाल विवाह पर समुचित एवं प्रभावी नियंत्राण के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकारों को सख्त कदम उठाने होंगे। ज्ञातव्य है कि बाल विवाह पर कानूनी रोक के बावजूद देश में सामूहिक बाल विवाह होते हैं।
- सबसे बढ़कर इस कुप्रथा को रोकने के लिए समाज को अपनी मानसिकता में परिवर्तन लाना होगा। उल्लेखनीय है कि सामाजिक सहयोग के बिना कोई भी कानून सही ढंग से लागू नहीं किया जा सकता है।
बाल विवाह को नियंत्रित करने से महिलाओं एवं बच्चों की स्थिति में क्या सुधार होगा?
- बाल विवाह लैंगिक अथवा मानव अधिकार से सम्बंधित मामला ही नहीं है बल्कि यह व्यापक जनसांख्यिकीय, शिक्षा, स्वास्थ्य एंव आर्थिक मुद्दा भी है। इस कुप्रथा के समाप्त होने से हमें स्वस्थ मानव संसाधन एवं कुशल श्रम शक्ति प्राप्त हो सकेगी।
- कम उम्र में शादी कर दिए जाने से माता के कमजोर स्वास्थ्य के कारण शिशु का स्वास्थ्य भी कमजोर होता है। इस कारण से जन्म के प्रथम महीने में ही 27 हजार शिशुओं की मृत्यु हो जाती है। बाल विवाह को नियंत्रित कर इन मृत्यु से बचा जा सकता है।
- कम उम्र में शादी होने से बालिकाओं को न तो शिक्षा का समुचित अवसर मिल पाता है और न ही व्यक्तित्व विकास का अतः बाल विवाह पर नियंत्रण स्थापित करने से बालिकाओं को शिक्षा के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास का भी समुचित अवसर प्राप्त हो सकेगा।
- सबसे बढ़कर बाल विवाह को नियंत्रित कर एवं शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध् कराकर कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है तथा आर्थिक विकास में महिलाओं के योगदान का लाभ उठाया जा सकता है।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा भारत में व्यापक रूप में विद्यमान है। इस कुप्रथा पर रोक लगाकर महिलाओं एवं बच्चियों के समुचित व्यक्तित्व विकास को आधार प्रदान किया जा सकता है तथा आर्थिक विकास में इनकी योग्यता का लाभ उठाया जा सकता है।