भारत में सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति एक कोलेजियम के द्वारा की जाती है। इस कोलेजियम में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के अलावा सर्वोच्च न्यायालय के ही अन्य चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं। कोलेजियम व्यवस्था पर हमेशा प्रश्न चिन्ह लगाये जाते रहे हैं क्योंकि इसकी प्रक्रिया गोपनीय थी। हाल ही में इस व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाया गया है।
हाल ही में न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं स्थानांतरण की प्रक्रिया में लाया गया बदलाव
- न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं स्थानातरण से सम्बंधित प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जायेगा तथा गोपनीयता की पिछली व्यवस्था को समाप्त किया जायेगा।
- ‘कोलेजियम’ के द्वारा की गयी समस्त सिपफारिशों को अब सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया जायेगा।
- केवल न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं स्थानांतरण से सम्बंधित सिफारिशों को ही सार्वजनिक नहीं किया जायेगा बल्कि इन सिफारिशों का आधार क्या है, यह ब्यौरा भी सार्वजानिक किया जायेगा।
- हाल ही में कोलेजियम ने पारदर्शिता के एक नये युग का आगाज करते हुए केरल उच्च न्यायालय एवं कर्नाटक उच्च न्यायालय के 13 न्यायाधीशों की नियुक्ति सम्बंधी सिफारिशें अपनी वेबसाइट में जारी कर दीं।
- गत 3 अक्टूबर, 2017 को कोलेजियम, के द्वारा एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसे मंजूरी प्रदान कर दी गयी। इस प्रस्ताव के अनुसार, जब भी किसी की हाईकोर्ट में नियुक्ति, स्थानांतरण, स्थायी किए जाने या सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति के लिए सरकार से सिफारिश की जायेगी वैसे ही सारी जानकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी जायेगी।
इस कदम से न्यायपालिका की छवि को सुधरने में किस प्रकार से मदद मिलेगी?
- इस कदम से न्यायपालिका मे लोगों का विश्वास बढे़गा क्योंकि कोलेजियम की अपारदर्शी व्यवस्था के कारण न्यायपालिका पर प्रश्न उठाये जा रहे थे।
- कोलेजियम की अपारदर्शी व्यवस्था के कारण कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के मध्य लम्बा संघर्ष चला था। इस पारदर्शी व्यवस्था को अपनाने से कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के बीच सामंजस्य बढ़ाने में भी मदद प्राप्त होगी।
- सबसे बढ़कर इस पारदर्शी व्यवस्था को अपनाने से देश के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी न्यायपालिका की छवि में सुधर होगा क्योंकि भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहाँ न्यायाधीश ही न्यायाधीशों की नियिुक्त करते हैं।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं स्थानातरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना एक सराहनीय पहल है। इससे न्यायपालिका पर लोगों का विश्वास बढ़ेगा तथा उसके विरूद्ध उठाये जाने वाले प्रश्नों पर विराम लगेगा।