हाल ही में सम्पन्न जापान के आम चुनाव में निवर्तमान प्रधानमंत्री शिंजो आबे को भारी जीत प्राप्त हुयी है। उनकी पार्टी ‘लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी’ को कुल 465 सीटों में से 283 सीटें प्राप्त हुई हैं। जबकि उनके सहयोगी दल कोमिटो को 29 सीटें प्राप्त हुयी हैं। इस प्रकार लिबरल डेमोव्रेफटिक पार्टी एवं कोमिटो गठबंधन को कुल 465 सीटों में से 312 सीटें प्राप्त हुयी हैं। विपक्षी दल ‘कांस्टीट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान’ को 54 सीटें एवं ‘पार्टी ऑफ होप’ को 49 सीटें प्राप्त हुयी हैं। शेष सीटें अन्य छोटे दलों को प्राप्त हुयी हैं।
जीत के पश्चात् जापानी प्रधानमंत्री के द्वारा तय की गई प्राथमिकतायें
- जीत के पश्चात जापानी प्रधानमंत्री ने तीन प्रमुख प्राथमिकतायें निर्धारित की हैं। प्रथम प्राथमिकता उत्तर कोरिया के सैन्य खतरे से निपटना है।
- उन्होंने दूसरी प्राथमिकता जापान की जनसंख्या संबंधी चुनौतियों से निपटना तय किया है। उल्लेखनीय है कि जापान में युवा जनसंख्या घट रही है और वृद्धों की जनसंख्या बढ़ रही है।
- उनकी तीसरी प्राथमिकता जापान के शांतिवादी संविधान में यथोचित संशोधन करना है। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि संविधान संशोधन के मामले पर सत्तारूढ़ एवं विपक्षी दलों के बीच व्यापक सहमति का होना अनिवार्य है।
शिंजो आबे की जीत से भारत-जापान संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- शिंजो आबे के कार्यकाल में भारत-जापान संबंधों को नया आयाम प्राप्त हुआ है। पिछले तीन वर्षों में भारतीय प्रधानमंत्री एवं शिंजो अबे कई बार आपस में मिल चुके हैं।
- सितम्बर, 2017 में शिंजो आबे वार्षिक शिखर बैठक में भाग लेने के लिए भारत आये थे। इस दौरान बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला उन्होंने भारत में रखी। इस प्रकार उनकी विजय से दोनों देशों के बीच इस तीव्र गति वाली ‘बुलेट ट्रेन परियोजना’ को शीघ्रातिशीघ्र पूरा करने में मदद प्राप्त होगी।
- सितम्बर, 2017 में जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे की भारत-यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि आपसी सहयोग के दायरे को एशिया के बाहर भी बढ़ाया जायेगा। चूँकि यह सहमति शिंजो आबे के काल में ही बनी थी अतः अब इसे आगे बढ़ाया जा सकेगा।
- सामरिक मामलों में भी भारत-जापान संबंधों को नयी मजबूती प्राप्त होगी। ज्ञातव्य है कि पिछले दिनों भारत-चीन के मध्य उत्पन्न डोकलाम विवाद के समय जापान ही एकमात्र ऐसा देश था जो सीधे तौर पर भारत के साथ खड़ा था।
- दोनों देशों के बीच श्रीलंका एवं ईरान में दो बंदरगाहों को एक साथ निर्मित करने पर बात हो रही है। इस मुद्दे पर अब आगे बढ़ना आसान होगा।
- सबसे बढ़कर दोनों देश एशिया एवं अफ्रीका में आधारभूत संरचना संबंधी परियोजनाओं को संयुक्त तौर पर विकसित करने के मामले पर आगे बढ़ सकेगें क्योंकि दोनों देशों के बीच अप्रैल, 2017 में इस संबंध में एक समझौता हो चुका है।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि शिंजो आबे की जीत जापान के साथ-साथ भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। इससे दोनों देशों के संबंधों को नयी मजबूती प्राप्त होगी।