हाल ही में भारत एवं चीन के बीच ‘डोकलाम’ क्षेत्र में जो विवाद उत्पन्न हुआ था उसका शांतिपूर्ण ढंग से समाधन कर लिया गया है। दोनों देशों की सेनाएँ वापस लौट चुकी हैं। ज्ञातव्य है कि यह विवाद उस समय प्रारंभ हुआ था जब चीन के द्वारा ‘डोकलाम’ क्षेत्र में सड़क का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया था।
‘डोकलाम’ एक पठार है जिस पर भूटान एवं चीन के बीच विवाद है। हाल ही में चीन ने इस ‘डोकलाम’ क्षेत्र में भूटान की चिंताओं को नजर-अंदाज करके सड़क निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया था।
भारत ने चीन के कृत्य पर आपत्ति व्यक्त की तथा उसे सड़क बनाने से रोक दिया। भारत इस मुद्दे पर भूटान की ओर से शामिल हुआ था। ज्ञातव्य है कि भारत एवं भूटान के बीच मैत्री संधि है जिसके अनुसार भूटान की सुरक्षा का दायित्व भारत पर है।
चीन ने ‘डोकलाम’ विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से क्यों सुलझाया?
चीन को इस बात का एहसास हो गया था कि भारत इस मामले में पीछे नहीं हटेगा। साथ ही उसे यह भी पता था कि भारत उसे हर प्रकार से जवाब देने में सक्षम है।
- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि एक शांतिपूर्ण एवं सह-आस्तित्व की भावना वाले देश के रूप में है। यही कारण था कि अमेरिका जैसे देश भारत के पक्ष में खड़े रहे।
- सितम्बर, 2017 में चीन में ब्रिक्स (BRICS) की बैठक होनी थी अतः चीन नहीं चाहता था कि इस बैठक में ‘डोकलाम’ विवाद की चर्चा हो और चीन की गलती सामने आये।
- चीन इस समय आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है। यदि भारत के साथ उसका विवाद बढ़ता तो निश्चित तौर पर इसका असर द्विपक्षीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता जो कि चीन के लिए नुकसानदेह होता।
- चीन ‘वन बेल्ट वन रोड’ (One Belt One Road) के तहत वैश्विक नेता बनने के प्रयास में संलग्न है। यदि वह ‘डोकलाम’ पर अपना आक्रामक रूप दिखाता तो वैश्विक स्तर पर उसकी छवि को हानि पहुँचती।
यदि चीन, ‘डोकलाम’ क्षेत्र में सड़क निर्मित करने में सफल हो जाता तो क्या परिणाम होता?
- यदि चीन, सड़क बनाने में सफल हो जाता तो वह शेष भारत को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाले ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के समीप पहुँच जाता तथा भारत की सुरक्षा के लिए संकट उत्पन्न कर सकता था।
- चीन की सफलता उसे प्रोत्साहित करती तथा वह आगे लद्दाख क्षेत्र एवं अरूणांचल प्रदेश पर अपना दावा प्रस्तुत करने तथा आक्रामकता प्रदर्शित करने का प्रयास करता।
- सबसे बढ़कर पड़ोसी देशों में यह संदेश जाता कि भारत, संधि की शर्तों का निर्वाह करने में सक्षम नहीं है। ज्ञातव्य है कि ‘डोकलाम’ विवाद में भारत, भूटान की ओर से शामिल हुआ था।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि ‘डोकलाम’ विवाद का शांतिपूर्ण हल दोनों देशों के साथ-साथ एशिया की शांति के लिए भी महत्वपूर्ण है। सबसे बढ़कर इससे यह भी स्पष्ट हो गया कि भारत अपनी एवं मित्रा राष्ट्रों की सम्प्रभुता की रक्षा करने में पूर्णतः समर्थ है।