हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के द्वारा देश में पहली बार केन्द्रीय विद्यालयों को रैंकिंग प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। केन्द्रीय विद्यालयों की रैंकिंग निर्धारित करने के लिए किन-किन मानकों का प्रयोग किया जाएगा? साथ ही बताइए कि इससे केन्द्रीय विद्यालयों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

30 अक्टूबर, 2017 को केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के द्वारा देश में पहली बार केन्द्रीय विद्यालयों की रैंकिंग निर्धारित करने का निर्णय लिया गया है। ज्ञातव्य है कि देश में 1000 से अधिक केन्द्रीय विद्यालय हैं जो कि अपनी बेहतर शिक्षा प्रणाली के लिए जाने जाते हैं।

केन्द्रीय विद्यालयों की रैंकिंग निर्धारित करने के लिए किन-किन मानकों का उपयोग किया जाएगा?

  • केन्द्रीय विद्यालयों की रैंकिंग अगले सत्र अर्थात 2018-19 से प्रारंभ की जाएगी। इसके लिए वर्ष में दो बार केन्द्रीय विद्यालयों का निरीक्षण किया जाएगा।
  • केन्द्रीय विद्यालयों की रैंकिंग निर्धारित करने के लिए सात मानकों का प्रयोग किया जाएगा।
  • इन सात मानकों में अकादमिक प्रदर्शन, विद्यालय प्रशासन, विद्यालय की आधारभूत संरचना, वित्तीय स्थिति, सामुदायिक भागीदारी, ग्रेस प्वांइट्स एवं निरीक्षकों के द्वारा किए गए समग्र पर्यवेक्षण को शामिल किया जाएगा।
  • अकादमिक प्रदर्शन को सबसे ज्यादा 500 अंक प्रदान किये जायेंगे। आधारभूत संरचना को 150 अंक, प्रशासन के लिए 120 अंक, वित्तीय स्थिति के लिए 70 अंक, सामुदायिक भागीदारी के लिए 60 अंक, ग्रेस प्वाइंट्स के लिए 90 अंक और निरीक्षकों के द्वारा किए जाने वाले समग्र पर्यवेक्षण को 10 अंक प्रदान किये जायेंगे।
  • इस प्रकार कुल 1000 अंकों के आधार पर केन्द्रीय विद्यालयों की रैंकिंग तैयार की जायेगी।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के इस निर्णय से केन्द्रीय विद्यालयों पर क्या प्रभाव पडेंगा?

  • इस निर्णय से केन्द्रीय विद्यालयों के बीच प्रतिस्पर्ध बढ़ेगी जिससे वे अपने समग्र प्रदर्शन में सुधार लाने के लिए कदम उठायेंगे।
  • इस रैंकिंग में कुल 1000 अंकों के आधार पर केन्द्रीय विद्यालयों को अलग-अलग श्रेणियों में शामिल किया जायेगा। उदाहरण के तौर पर, 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक पाने वाले विद्यालयों को ‘ए’ श्रेणी में, 60 से 79.9 प्रतिशत अंक पाने वालों को ‘बी’ श्रेणी में, 40 से 59.9 प्रतिशत अंक पाने वालों को ‘सी’ श्रेणी में तथा 40 प्रतिशत से कम अंक पाने वालों को ‘डी’ श्रेणी में शामिल किया जाएगा।
  • इस श्रेणीकरण का प्रभाव यह होगा कि इससे अधिकांश केन्द्रीय विद्यालय अपने स्तर में सुधार लाने का प्रयास करेंगे और ‘ए’ श्रेणी में शामिल होने के प्रति तत्परता दिखायेंगे।
  • ज्ञातव्य है कि देश में उच्च शैक्षिक संस्थानों की रैंकिंग वर्ष 2016 से जारी की जा रही है। यह रैंकिंग ‘एनएएसी’  (NAAC- National Assessment and Accreditation Council) के द्वारा की जाती है।

निष्कर्ष : केन्द्रीय विद्यालयों की रैंकिंग का निर्णय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की  एक सराहनीय एवं नवाचारी पहल है जिससे केन्द्रीय विद्यालयों के स्तर में वृद्धि लाने में मदद मिलेगी।

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