मुहावरों का महत्त्व
1 भाषा को सजीव बनाते है।
2 कथन को प्राणयुक्त एवं प्रभावपूर्ण बनाते है।
3 भाषा में सरलता एवं सरसता उत्पन्न करते है।
4 भाषा में प्रवाह व चमत्कार उत्पन्न करते है।
5 भाषा को समृद्ध बनाते है।
मुहावरों के प्रयोग में सावधानियाँ-
1 पहले मुहावरा फिर उसका अर्थ तथा अगली लाइन से वाक्य प्रयोग करना चाहिए। जैसे- बात का धन-वायदे का पक्का
मैं जानता हूँ कि वह बात का धनी है।
2 मुहावरे का वाक्य प्रयोग करते समय तुलना नहीं करनी चाहिए, जैसे- के समान, की तरह, के जैसा आदि शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यथा-अंधे की लकड़ी-एक मात्र सहारा।
अपने वृद्ध माता-पिता का एक मात्र संतान मोहन उनके लिए अंधे की लकड़ी (के समान) है। ×
अपने वृद्ध माता-पिता का एक मात्र संतान मोहन उनके लिए अंधे की लकड़ी है।
3 मुहावरों को कहीं भी डाल देना गलत है, बल्कि कारण बताते हुए कार्य बताना है।
4 घिसे-पिटे वाक्य प्रयोग से बचना चाहिए।
5 वाक्य प्रयोग का संदर्भ यथा संभव छोटा रखना चाहिए।
6 वाक्य प्रयोग में मुहावरे का प्रयोग करना होता न कि उसके अर्थ का।
7 मुहावरे को एक वाक्य में लिखना चाहिए, जैसे-टेढ़ी खीर होना-कठिन काम होना।
अपने देश में भ्रष्टाचार की जड़े इतनी गहरी हो गयी है कि इसे खत्म करना टेढ़ी खीर हो गई है।