3. सार्वनामिक विशेषण: पुरूषवाचक या निजवाचक सर्वनामों को छोड़कर अन्य सर्वनाम जब किसी संज्ञा की विशेषता बतलाएँ तो उन्हें ‘सार्वनामिक विशेषण’ कहते है। यथा-यह, वह, कौन, क्या, जो, जिस, ऐसा
यह आदमी विश्वासी है। ये लड़के कहाँ जा रहे है? ऐसा आदमी तो देखा नहीं। मेरा घर इसी शहर में है। आपका पत्र मिला।
सार्वनामिक विशेषण के दो उप-भेद है-
1. मौलिक 2. यौगिक
1. मौलिक-जो सर्वनाम अपने मूल रूप में किसी संज्ञा की विशेषता बताते है, उन्हें मौलिक सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। यथा- यह आदमी चोर है। ये लोग भले है। कोई व्यक्ति आया था।
2. यौगिक-जो सर्वनाम किसी प्रत्यय के योग से बनकर किसी संज्ञा की विशेषता बतलाते हैं उन्हें ‘यौगिक सार्वनामिक विशेषण’ कहते हैं। यथा-ऐसा लड़का मिलना कठिन है। कैसा सामान लाए हो?
अन्य यौगिक सर्वनाम हैं-ऐसा, कैसा, जैसा, मेरा, तुम्हारा, आपका, कितना, इतना, अपना आदि।
4. संख्यावाचक विशेषण: जिस विशेषण से संज्ञा की संख्या का बोध हो उसे संख्यावाचक विशेषण कहते है। यथा-यहाँ दो बालक तथा तीन बालिकाएँ हैं। वे दोनों स्कूल गए। यहाँ हर एक आदमी ईमानदार है।
संख्यावाचक विशेषण के पाँच भेद है-
1. गणनावाचक 2. क्रमवाचक
3. आवृत्तिवाचक 4. समुदायवाचक
5. प्रत्येक बोधक
1. गणनावाचक-दो आदमी आ रहे है। (पूर्णांकबोधक संख्या वाचक) आधा किलो दाल बची है। (अपूर्णांकबोधक संख्या वाचक)
2. क्रमवाचक-पहला व्यक्ति आगे रहेगा। पाँचवाँ और छठा आदमी एक-दूसरे के पीछे रहेंगे।
3. आवृत्तिवाचक-दूना, चार गुना, दोबारा
4. समुदायवाचक-जो संख्या वाचक विशेषण समूह या समुदाय का बोध कराए। यथा-दोनों, तीनों, चारों आदि।
5. प्रत्येकबोधक-जो संख्या एक का बोध कराए। यथा-प्रत्येक, हरेक, एक-एक।