निजता के अधिकार को उच्चतम न्यायालय के द्वारा मौलिक अधिकार का दर्जा प्रदान कर दिया गया है, स्पष्ट कीजिए। उच्चतम न्यायालय का यह निर्णय नागरिकों के व्यक्तिगत जीवन को किस प्रकार प्रभावित करेगा? साथ ही स्पष्ट कीजिए कि उच्चतम न्यायालय के इस निर्णय से किस प्रकार की समस्याएँ सामने आ सकती है?

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय की 9 सदस्यीय संविधान पीठ के द्वारा ‘निजता के अधिकार’ (Right To Privacy) को मौलिक अधिकार की सूची में शामिल कर दिया गया है। निजता के अधिकार को ‘अनुच्छेद 21’ में अंतर्निहित माना गया है। ज्ञातव्य है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में नागरिकों को ‘प्राण एवं दैहिक स्वतंत्राता का संरक्षण’ संबंधी मौलिक अधिकार प्रदान किया गया है।

सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय से नागरिकों के व्यक्तिगत जीवन पर प्रभाव

  • नागरिकों को अपना जीवन अपने हिसाब से जीने का अधिकार होगा लेकिन शर्त यह है कि उनके द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के जीवन में हस्तक्षेप न हो।
  • राज्य को यह अधिकार नहीं होगा कि वह किसी व्यक्ति के ‘निजी जीवन’ में हस्तक्षेप करे। साथ ही राज्य किसी व्यक्ति के निजी जीवन को विनियमित भी नहीं कर सकेगा।
  • बिना समुचित कारण एवं प्राधिकार के राज्य को किसी व्यक्ति के निजी जीवन की निगरानी का अधिकार भी नहीं होगा।
  • व्यक्ति अपना स्वयं का जीवन जी सकेगा अर्थात् वह बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप एवं भय के अपना ‘निजी जीवन’ जी सकेगा।
  • वर्तमान के तकनीकी प्रधान समाज में ‘इंटरनेट’ के माध्यम से ‘निजता’ की सुरक्षा कठिन चुनौती है। उपर्युक्त निर्णयों से लोगों की निजता को इंटरनेट के माध्यम से सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी।

सर्वोच्च न्यायालय के उपर्युक्त निर्णय से सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियाँ

  • निजता के अधिकार के नाम पर कुछ समाज विरोधी तत्व गैर-कानूनी गतिविधियों में संलग्न हो सकते हैं। ऐसे तत्वों की निगरानी कठिन हो सकती है।
  • घरेलू हिंसा मसलन महिलाओं एवं बच्चों के उत्पीड़न से संबंधित घटनाएँ बढ़ सकती है क्योंकि लोग घर के भीतर होने वाली घटनाओं को निजता के अधिकार के दायरे में शामिल कराने का प्रयास करेंगे।
  • अपराधी तत्वों को नियंत्रित करना कठिन हो जाएगा क्योंकि लोग निजता के अधिकार के नाम पर अपराधी तत्वों के संबंध में जानकारी प्रदान करने और गवाही देने से इंकार कर सकते हैं।
  • इससे सरकार की लक्षित कल्याणकारी योजनाओं को संचालित करने में समस्या आ सकती है क्योंकि लोग आवश्यक निजी जानकारी प्रदान करने से इंकार कर सकते हैं।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि ‘निजता का अधिकार’ एक ओर जहाँ लोगों के गरिमापूर्ण जीवन को सुनिश्चित करता है वहीं दूसरी ओर यह प्रशासन के संचालन एवं देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करने में समस्या भी उत्पन्न कर सकता है।

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