हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को माओत्से तुंग के समान दर्जा प्रदान किया गया है, स्पष्ट कीजिए। शी जिनपिंग की विचारधारा, जिसे चीन के संविधान में शामिल किया गया है, क्या है? यह विचारधारा चीन को मजबूत बनाने में किस प्रकार की भूमिका अदा करेगी?

हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को न सिर्फ पाँच वर्ष का दूसरा कार्यकाल प्रदान किया गया बल्कि उनके नाम एवं सिद्धांत को भी चीन के संविधान में शामिल कर लिया गया। इस प्रकार शी जिपपिंग कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक एवं सबसे पहले नेता माओत्से-तुंग के पश्चात सर्वाधिक शक्तिशाली नेता बन गये हैं।

ज्ञातव्य है कि अभी तक सिर्फ माओत्से-तुंग के नाम एवं सिद्धांत को ही उनके पद पर रहते हुये चीन के संविधान में शामिल किया गया था। शी जिनपिंग दूसरे राष्ट्रपति हैं जिनके पद पर रहते हुए उनके नाम एवं सिद्धांत को चीन के संविधान में शामिल किया गया है। यही कारण है कि शी जिनपपिंग को ‘माओ’ के बाद दूसरा शक्तिशाली नेता माना जा रहा है। हालांकि देंग जियाओपिंग का सिद्धांत भी चीन के संविधान में शामिल किया गया है किंतु उनका नाम उनकी मृत्यु के बाद वर्ष 1997 में जोड़ा गया था।

चीन के संविधान में शामिल की गयी शी जिनपिंग की विचारधारा

  • शी जिनपिंग की विचारधारा ‘‘नये युग के लिए चीन की विशेषताओं के साथ समाजवाद’’ है।
  • शी जिनपिंग की विचारधारा समाजवाद एवं चीन की विशेषताओं के संयोजन पर केन्द्रित है।
  • इस विचारधारा में चीन की सुस्त अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करना, चीन के व्यापार को विश्व भर में फैलाना तथा भ्रष्टाचार मुक्त चीन का निर्माण शामिल है।
  • जिनपिंग की इस विचारधारा में विकास के नवीन तरीकों एवं नवीन सुधारों के बारे में भी विस्तारपूर्वक उल्लेख किया गया है।
  • शी जिनपिंग ने अपनी विचारधारा में पर्यावरण संरक्षण एवं ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अक्षय ऊर्जा स्रोतों पर बल प्रदान करने की बात की है।
  • सबसे बढ़कर उनकी इस विचारधारा में हांगकांग एवं ताइवान को पुनः चीन में शामिल करने का उल्लेख भी किया गया है।
  • साथ ही चीन की सेना पर कम्युनिस्ट पार्टी के पूरे अधिकार एवं नियंत्रण का उल्लेख भी इस विचारधारा में किया गया है।

शी जिनपिंग की विचारधारा चीन को सशक्त बनाने में किस प्रकार की भूमिका अदा करेगी?

  • शी जिनपिंग की विचारधारा चीन को प्रत्येक आयाम में विकास के मार्ग पर अग्रसर करने के उद्देश्य से परिचालित है अतः यह चीन को मजबूती प्रदान करेगी।
  • यह विचारधारा चीन के लोगों को एकजुट करने में भी मददगार होगी क्योंकि इस विचारधारा को कम्युनिस्ट पार्टी के 9 करोड़ सदस्यों के द्वारा तो स्वीकार किया ही जाएगा साथ ही स्कूलों एवं कॉलेजों के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जायेगा।
  • इस विचारधारा के अनुसार वर्ष 2021 तक चीन को समृद्ध एवं आधुनिक समाज में विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया  गया है। ज्ञातव्य है कि 2021 में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं।

निष्कर्ष : निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि शी जिनपिंग की विचारधारा चीन के सर्वतोमुखी विकास के उद्देश्य से परिचालित है। इस विचारधारा को चीन के संविधान में शामिल करना अहम है क्योंकि इससे चीन के सभी आयामों में विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।

Posted on by