खाद्य रेशा शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम हिप्सले नामक वैज्ञानिक के द्वारा किया गया था। खाद्य रेशा का पाचन मनुष्य की छोटी आंत में नहीं होता है। मनुष्य की बड़ी आंत में पाये जाने वाले सहजीवी जीवाणुओें द्वारा खाद्य रेशे का आंशिक या पूर्णतः किण्वन होता है।
मनुष्य के भोजन में खाद्य रेशे का एकमात्र स्त्रोत वानस्पतिक खाद्य पदार्थ ही होते हैं। पौधें के पर्ण, पुष्प, मूल, स्तम्भ, फल तथा बीज आदि सभी भागों में रेशा पाया जाता है। सेल्युलोज सर्वाधिक मात्रा में उपलब्ध खाद्य रेशा है। सेल्युलोज पादपों की कोशिका भित्ति में उपस्थित होता है।
खाद्य रेशे की कार्यप्रणाली
- खाद्य रेशा छोटी आंत से प्रभावित हुए बिना बड़ी आंत में प्रवेश करता है। इसके पश्चात बड़ी आंत में मौजूद सहजीवी जीवाणु इस खाद्य रेशे का किण्वन करते हैं।
- खाद्य रेशा मल को बाँधे रखता है तथा अपनी अवशोषण क्षमता के कारण मल में पर्याप्त नमी बनाये रखता है। खाद्य रेशे में लिग्निन भी मौजूद रहता है जो रेचक का कार्य करता है।
- ये उपर्युक्त सभी कारक (Factor) बिना पचे हुए भोजन को आहारनाल में आगे बढ़ाने का कार्य करते हैं। इससे कब्ज का अंत होता है।
- भेाजन में मौजूद रेशा (Fiber) प्रोटीन के पाचन के पश्चात उत्पन्न होने वाली अमोनिया गैस को अवशोषित कर लेता है।
- इसी प्रकार खाद्य रेशा आहारनाल में शर्करा के अवशोषण की दर को कम कर देता है तथा रक्त में ग्लूकोज एवं इन्सुलिन की मात्रा को नियंत्रित रखता है।
रेशायुक्त खाद्य पदार्थों का महत्त्व तथा मनुष्य के स्वास्थ्य पर इनका प्रभाव
- रेशायुक्त खाद्य पदार्थों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये भोजन के पाचन की दर को बढ़ा देते हैं तथा शरीर में जल की पर्याप्त मात्रा बनाये रखते हैं।
- अमेरिका के ‘जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रीशन’ में छपे एक लेख के अनुसार, कई रेशायुक्त खाद्य पदार्थों में कोलेस्ट्रॉल को कम करने की क्षमता औषधियों के बराबर होती हैं।
- वैज्ञानिकों के अनुसार खाद्य रेशा ‘एन्टीऑक्सीडेन्ट’ की तरह भी कार्य करता है। इससे न सिर्फ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है बल्कि बुढ़ापे की दर भी कम होती है।
- हाल के शोधों से पता चला हे कि बड़ी आंत में किण्वन क्रिया के कारण कई विलेय रेशे गैस तथा लघु श्रृंखला वसीय अम्लों में विघटित हो जाते हैं और ऊर्जा उत्पादन में अहम भूमिका अदा करते है।
- खाद्य रेशों के कारण बड़ी आंत में हानिकारक पदार्थों का अवशोषण नहीं होता है जिससे कैंसर आदि उत्पन्न करने वाले पदार्थ बिना अवशोषित हुए शरीर से बाहर निकल जाते हैं।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि खाद्य रेशा मानव स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पाचन क्रिया को ठीक रखता है तथा हानिकारक पदार्थों को बिना अवशोषित किये बाहर निकाल देता हैं।