निवेश (Investment) का उद्देश्य हमेशा लाभ प्राप्त करना होता है। इसी प्रकार स्वच्छता के सम्बंध में भी निवेश किया जाता है। उदाहरण के तौर पर शौचालयों के निर्माण, कचरा एकत्रित करने एवं कचरे के प्रबंधन में लोगों एवं सरकार के द्वारा निवेश किया जाता है।
इस निवेश का उद्देश्य स्वच्छता की स्थापना एवं स्वस्थ जीवन की प्राप्ति होती है। स्वस्थ एवं निरोगी जीवन ही इस निवेश का प्रतिफल होता है। इसके अतिरिक्त एकत्रित किये गये कचरे का यदि समुचित एवं वैज्ञानिक ढंग से निपटान किया जाये तो उससे हम जैव उर्वरक जैसे उत्पाद भी प्राप्त कर सकते हैं और साथ ही बिजली का उत्पादन भी कर सकते हैं।
स्वच्छ भारत मिशन की अब तक की सफलता
- स्वच्छ भारत मिशन की शुरूआत 2 अक्टूबर 2014 को की गयी थी। 2 अक्टूबर 2014 से अब तक इस मिशन के अंतर्गत देश भर में 5 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है।
- 30 सितम्बर 2017 तक के आँकड़ो के अुनसार 6 राज्यों, 217 जिलों एवं 2.5 लाख से अधिक गाँवो को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है।
- देश में स्वच्छता की स्थिति 2 अक्टूबर 2014 को 39 प्रतिशत थी जो वर्तमान समय तक बढ़कर 69 प्रतिशत हो गयी है।
स्वच्छता में कमी के कारण किस प्रकार के आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है?
- विश्व बैंक के द्वारा अपने एक अध्ययन से साबित किया गया है कि स्वच्छता में कमी के कारण भारत को अपने सकल घरेलू उत्पाद के 6 प्रतिशत से अधिक का नुकसान उठाना पड़ता है।
- इसी प्रकार विश्व बैंक के एक अन्य अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि स्वच्छता की कमी के कारण भारत के तकरीबन 40 प्रतिशत बच्चे मानसिक एंव शारीरिक रूप से कम विकसित हैं।
- यदि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरूद्ध होगा तो देश को कमजोर मानव संसाधन प्राप्त होगा जिससे हम ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ (Demographic Dividend) का लाभ नहीं प्राप्त कर पायेंगे।
- यूनीसेफ (UNICEF) के द्वारा भी स्वच्छता के आर्थिक प्रभाव एक अध्ययन किया गया है। इसके मुताबिक खुले में शौच से मुक्त गांव में प्रत्येक परिवार चिकित्सा के खर्च, समय एवं जीवन की रक्षा के लिहाज से प्रतिवर्ष तकरीबन 50,000 रूपये बचाता है।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि स्वच्छता में निवेश से प्रतिफल के रूप में स्वास्थ्य जीवन प्राप्त होता है तथा समुचित शारीरिक एवं मानसिक विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।