भारतीय राष्ट्रपति के द्वारा प्रारम्भ किये गये ?स्वच्छता ही सेवा? नामक राष्ट्रव्यापी जनांदोलन का सविस्तार उल्लेख कीजिए। साथ ही बताइए कि स्वच्छ भारत मिशन के स्वप्न को साकार करने के उद्देश्य से प्रारंम्भ किया गया स्वच्छाथॉन क्या है? यह स्वच्छ भारत के निर्माण में किस प्रकार सहायक होगा?

भारतीय राष्ट्रपति के द्वारा उत्तर प्रदेश के कानुपर जिले के ईश्वरीगंज नामक गाँव से स्वच्छता ही सेवा नामक राष्ट्रव्यापी जनांदोलन की शुरूआत की गयी। इस जनांदोलन की शुरूआत 15 सितम्बर, 2017 से की गयी। 15 सितम्बर से 2 अक्टूबर, 2017 तक शौचालय निर्माण एवं सार्वजनिक स्थानों की साफ सफाई के लिए लोगों से सामूहिक श्रमदान का आह्वान किया गया।

इसका उद्देश्य स्वच्छता के लिए देशव्यापी स्तर पर लोगों को संगठित करना था। इसके तहत केन्द्रीय मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, विख्यात खिलाड़ियों, जानी-मानी हस्तियों आदि से स्वच्छता अभियान से जुड़ने की अपील की गयी। राष्ट्रपति के द्वारा इस अवसर पर ‘स्वच्छता ही सेवा’ की राष्ट्रव्यापी शपथ ग्रहण करवायी गयी जिसके साथ ही देश भर की पंचायतों एवं शहरों में एक साथ कार्यवाही शुरू हो गयी।

उन्होंने कहा कि स्वच्छता के लिए कार्य करने वाला प्रत्येक नागरिक राष्ट्र-निर्माता है। उन्होंने इस दौरान विश्व बैंक के एक अध्ययन का उदाहरण भी प्रस्तुत किया जिसके अनुसार स्वच्छता की कमी के कारण देश की जीडीपी को वार्षिक 6 प्रतिशत का नुकसान होता है।

स्वच्छ भारत के निर्माण के लिए प्रारंम्भ किया गया स्वच्छाथॉन क्या है?

  • स्वच्छ भारत मिशन के स्वप्न को साकार करने के उद्देश्य से प्रारंम्भ किया गया स्वच्छाथॉन पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय की पहल है।
  • इसके तहत स्वच्छता तथा सफाई के मार्ग में उपस्थित चुनौतियों के समाधान के लिए लोगों से समाधान माँगा गया।
  • इस प्रयास में स्कूल, कॉलेजों, संगठनों पेशेवर लोगों, स्टार्ट-अप एवं अन्य विभिन्न पक्षों से स्वच्छता तथा सफाई के सम्बंध में उपस्थित चुनौतियों से निपटने के समाधान माँगे गये।
  • सबसे बढ़कर स्वच्छाथॉन के माध्यम से आम जनता को स्वच्छता क्रांति से जोड़ने का प्रयास किया गया।

स्वच्छाथॉन स्वच्छ भारत के निर्माण में किस प्रकार सहायक होगा?

  • स्वच्छाथॉन के तहत लोगों को शौचालयों के उपयोग की निगरानी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि अधिकाधिक लोग शौचालयों का इस्तेमाल करें।
  • लोगों को स्वच्छता के अर्थशास्त्रा को समझाना तथा उनके व्यवहार में बदलाव लाने का प्रयास करना।
  • विद्यालयों के शौचालयों के समुचित परिचालन की व्यवस्था करना तथा उनका रखरखाव सुनिश्चित करना।
  • स्वच्छाथॉन के तहत स्वच्छता के मार्ग में आने वाली चुनौतियों के समाधन के लिए देश भर से 3035 लोगों ने अनूठे एवं नवाचारी समाधान साझा किये।
  • इस दौरान डिजिटल मंच मसलन फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब, आदि के माध्यम से 5 करोड़ से अधिक लोगों से संपर्क स्थापित किया गया।
  • 5000 से अधिक संगठन स्वच्छता के लिए प्रयासरत हैं। इन संगठनों में यूनीसेफ, विश्व बैंक, टाटा ट्रस्ट, ‘वाटर एड’ एवं अनेक गैर-सरकारी संगठन शामिल हैं।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि स्वच्छता ही सेवा तथा स्वच्छाथॉन जैसी पहलों से देश में स्वच्छता के प्रति एक नया माहौल निर्मित हुआ है। इस प्रकार की पहलें निश्चित तौर पर स्वच्छ भारत के स्वप्न को सरकार करने में अहम भूमिका अदा करेंगी।

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