विश्व खाद्य दिवस के प्रमुख उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए। विश्व खाद्य दिवस 2017 के अनुसार विश्व में भुखमरी की क्या स्थिति है? क्या अनाजों की वैश्विक बर्बादी को भुखमरी का प्रमुख कारण माना जा सकता है? इस समस्या के निदान के लिए आप कौन से उपाय प्रस्तुत करेंगे?

16 अक्टूबर, 1945 को खाद्य एवं कृषि संगठन की स्थापना हुई। इस संगठन के सदस्य देशों ने वर्ष 1979 से प्रतिवर्ष 16 अक्टूबर को ‘विश्व खाद्य दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया। प्रथम विश्व खाद्य दिवस 16 अक्टूबर, 1980 को मनाया गया।

विश्व खाद्य दिवस का उद्देश्य भुखमरी एवं गरीबी की समस्या के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना है ताकि भोजन की बर्बादी को कम से कम किया जा सके। वर्ष 2017 की थीम ‘प्रवासन के भविष्य को बदलना तथा खाद्य सुरक्षा एवं ग्रामीण विकास में निवेश करना’ रखी गई है। ज्ञातव्य है कि गरीब एवं युद्धग्रस्त देशों से पलायन करने वाले प्रवासियों के कारण भुखमरी की समस्या गंभीर होती जा रही है।

विश्व खाद्य दिवस, 2017 के अनुसार वैश्विक स्तर पर भुखमरी की स्थिति

विश्व खाद्य दिवस, 2017 के अनुसार वैश्विक स्तर पर तकरीबन 85 करोड़ लोग भुखमरी की स्थिति में हैं। यह संख्या विश्व की कुल आबादी का तकरीबन 13 प्रतिशत है।

  • दुनिया में जो 85 करोड़ लोग भुखमरी से ग्रस्त है उनमें से तकरीबन 20 करोड़ लोग भारत के हैं। इस प्रकार भुखमरी से पीड़ित कुल संख्या का तकरीबन एक-चौथाई हिस्सा भारत में निवास करता है।
  • भुखमरी से पीड़ित कुल आबादी में से 60 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की है।
  • वार्षिक तौर पर तकरीबन 90 लाख लोग प्रतिवर्ष भोजन की कमी से मरते हैं। इन 90 लाख लोगों में से 39 लाख बच्चे हैं।

क्या अनाजों की वैश्विक बर्बादी को भुखमरी का प्रमुख कारण माना जा सकता है?

भारत सहित दुनिया के विभिन्न देशों में अनाजों की बर्बादी भुखमरी की समस्या का प्रमुख कारण है। इसे निम्न तथ्यों से समझ सकते हैं-

  • वैश्विक स्तर पर तकरीबन 1.3 अरब टन खाद्य पदार्थ वार्षिक बर्बाद होते हैं। इसी प्रकार भारत में उत्पादित कुल खाद्यान्न का तकरीबन 40 प्रतिशत हिस्सा नष्ट हो जाता है।
  • इस प्रकार यदि उपर्युक्त बर्बाद होने वाले भोजन को बचा लिया जाये तो दुनिया के 85 करोड़ भुखमरी से ग्रस्त लोगों को चार बार भोजन उपलब्ध कराया जा सकता है।

इस समस्या के निराकरण के लिए प्रयुक्त उपाय

दुनियाभर में भुखमरी की स्थिति की वास्तविकता से लोगों को परिचित कराना तथा इस समस्या के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना।

  • अनाज की बर्बादी से भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन भी होता है। अतः इस वैज्ञानिक तथ्य से भी लोगों को परिचित कराना।
  • उच्च उत्पादकता वाले बीजों का प्रयोग कर उत्पादन को बढ़ाना होगा क्योंकि वर्ष 2050 तक बढ़ी हुई आबादी का पेट भरने के लिए 60 प्रतिशत अधिक भोजन उत्पादित करने की जरूरत होगी।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि भोजन की बर्बादी एवं राजनीतिक इच्छाशक्ति में कमी ही भुखमरी एवं कुपोषण का प्रमुख कारण है। इस बर्बादी को नियंत्रित कर भुखमरी की समस्या का काफी हद तक निराकरण किया जा सकता है।

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