हाल ही में पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री के द्वारा देश के 20 विश्वविद्यालयों को विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करने की घोषणा की गई। इन 20 विश्वविद्यालयों को योग्यता के आधार पर चुना जायेगा। जिनमें 10 विश्वविद्यालय सरकारी एवं 10 विश्वविद्यालय निजी क्षेत्र के होंगे।
योग्यता के आधार पर चुने गए इन 20 विश्वविद्यालयों को पाँच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया जायेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राचीन काल में भारत के नालंदा एवं विक्रमशिला विश्वविद्यालय सम्पूर्ण विश्व में विख्यात थे किन्तु वर्तमान में विश्व के सर्वश्रेष्ठ 500 विश्वविद्यालयों में भारत का एक भी विश्वविद्यालय शामिल नहीं है।
देश में उच्च शिक्षा को विश्व स्तरीय बनाना क्यों आवश्यक है?
- भारत से लाखों युवा प्रतिवर्ष उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं। यदि भारत में ही शिक्षा के स्तर को विश्व स्तरीय बना दिया जाये तो युवाओं को भारत से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
- भारत में प्रतिवर्ष लाखों युवा डिग्री प्राप्त करते हैं किन्तु औद्योगिक जगत का कहना है कि इनमें से अधिकांश डिग्री धरक उद्योग एवं कॉर्पोरेट क्षेत्र की मांग के अनुरूप क्षमता नहीं रखते हैं।
- भारत को पुनः शिक्षा के वैश्विक केन्द्र के रूप में स्थापित किया जा सकेगा जिससे विदेशी विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए भारत में आ सकेंगे।
- इससे भारतीय उच्च शिक्षा में शोध् एवं नवाचार को बढ़ावा मिलेगा जिससे स्टार्ट-अप के मामले में भारत को दुनिया में अव्वल बनाया जा सकेगा।
उच्च शिक्षा में सुधर के संबंध् में यह घोषणा किस सीमा तक प्रभावी होगी?
- उच्च शिक्षा में सुधार के सम्बंध में यह घोषणा काफी महत्वपूर्ण है। इसके तहत 20 विश्वविद्यालयों को योग्यता के आधार पर चुना जायेगा जिससे विश्वविद्यालयों के बीच प्रतिस्पर्ध बढ़ेगी और वे बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करेंगे।
- योग्यता के आधार पर चुने गए इन विश्वविद्यालयों को 10 हजार करोड़ रुपये का अनुदान दिया जायेगा। जिससे इन 20 विश्वविद्यालयों की आधारभूत संरचना को अत्याधुनिक बनाया जा सकेगा।
- किन्तु इस घोषणा की एक सीमा है क्योंकि महज 20 विश्वविद्यालयों पर ध्यान केन्द्रित करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों को शामिल करना जरूरी होगा।
- सबसे बढ़कर उच्च शिक्षा में सुधार तभी सम्भव है जब प्राथमिक एवं द्वितीयक स्तर की शिक्षा में सुधार किए जायें। इस प्रकार सर्वप्रथम प्राथमिक एवं द्वितीयक स्तर की शिक्षा में सुधार की जरूरत है।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि उच्च शिक्षा में सुधार के सम्बंध में उपर्युक्त घोषणा महत्वपूर्ण है किन्तु इसकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए उपरोक्त उल्लिखित सुधरों को भी लागू करने की जरूरत है।