हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा 12 ऐसे सुपरबग्स की सूची जारी की गई है जो मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। इस सूची को जारी करने का उद्देश्य सुपरबग्स के प्रति आम लोगों को जागरूक बनाना है। ज्ञातव्य है कि सुपरबग्स की समस्या असंतुलित एवं व्यापक मात्रा में एंटीबॉयोटिक दवाओं के इस्तेमाल के कारण उत्पन्न हुई है।
सुपरबग्स के सम्बंध में महत्वपूर्ण जानकारी
सुपरबग्स जीवाणुओं (Bacteria) का एक प्रकार है। सुपरबग्स एंटीबॉयोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधकी क्षमता विकसित कर लेते हैं अर्थात इनके ऊपर एंटीबॉयोटिक दवाओं का कोई असर नहीं होता है।
- दरअसल बैक्टीरिया एंटीबॉयोटिक दवाओं के प्रोटीन अणुओं से स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए अपने भीतर एक जीन विकसित कर लेता है तथा पीढ़ी दर पीढ़ी इसे आगे बढ़ाने का प्रयास करता है।
- इसी प्रकार सुपरबग्स बैक्टीरिया एंटीबॉयोटिक दवाओं के प्रतिरोध के लिए एंजाइम उत्पन्न करते हैं। यह एंजाइम एंटीबॉयाटिक दवाओं के असर को निष्प्रभावी कर देता है।
- वर्तमान समय में लोग छोटी-छोटी समस्याओं के लिए एंटीबॉयोटिक दवाओं का प्रयोग करते हैं जिसके कारण धीरे-धीरे उनके शरीर में एंटीबॉयोटिक दवाओं का कोई असर ही नहीं होता है।
- यही कारण है कि वर्तमान समय में सुपरबग्स अधिक ताकतवर होते जा रहे हैं। डॉक्टर भी इस बात पर एकमत हैं कि एंटीबॉयोटिक दवाओं के असंतुलित एवं व्यापक प्रयोग के कारण ही सुपरबग्स की समस्या अधिक गंभीर होती जा रही है।
सुपरबग्स के नियंत्राण के लिए वैश्विक स्तर पर उठाये गए कदम
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा सुपरबग्स के नियंत्रण के लिए सर्वप्रथम कदम उठाया गया तथा वर्ष 2015 में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (Antimicrobia Resistance) पर ग्लोबल एक्शन प्लान जारी किया गया।
- इस ग्लोबल एक्शन प्लान का उद्देश्य रोगाणुरोधी प्रतिरोध के सम्बंध में शोध आदि को बढ़ावा देना तथा इसके प्रति लोगों को जागरूक बनाना था।
- रोगाणुरोधी प्रतिरोध के क्षेत्र में सतत निवेश को बढ़ावा देना तथा संक्रमण की घटनाओं को कम से कम करने का प्रयास करना।
सुपरबग्स के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर किए गए प्रयास
भारत में सुपरबग्स के नियंत्राण के लिए केन्द्र सरकार के द्वारा ‘एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस’ (Antimicrobia Resistance) पर राष्ट्रीय कार्ययोजना की शुरूआत की गई है।
- भारत ने सुपरबग्स के प्रभावी नियंत्राण के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन, संयुक्त राष्ट्र संघ एवं खाद्य तथा कृषि संगठन के साथ मिलकर दिल्ली घोषणा पत्रा को अपनाया है।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि सुपरबग्स की समस्या स्वास्थ्य के क्षेत्र में गंभीर स्वरूप धारण करती जा रही है इस समस्या के निदान के लिए वैश्विक एवं राष्ट्रीय दोनों ही स्तरों पर प्रयास करने होंगे।