हाल ही में भारत एवं यूरोपीय संघ के बीच नई दिल्ली में 14वाँ सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में दोनों के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ाने परसहमति बनी किंतु बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति नहीं बन सकी।
इस सम्मेलन में भारत-यूरोपीय संघ के मध्य किन महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी?
- इस सम्मेलन के दौरान दोनों पक्षों के बीच आतंकवाद के विरूद्ध एकजुट होकर कार्य करने के लिए सहमति बनी।
- भारत एवं यूरोपीय संघ के मध्य हिंद महासागर एवं अन्य सागरीय क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने पर सहमति बनी है। दोनों पक्षों के नौ सैनिक शीघ्र ही अदन की खाड़ी में संयुक्त सैन्य अभ्यास करेंगे।
- दोनों पक्षों के बीच जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए संयुक्त कार्यवाही पर सहमति बनी। भारत के द्वारा पुनः पेरिस जलवायु समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई गयी।
- सबसे बढ़कर दोनों पक्षों ने रोहिंग्या समस्या पर भी आपसी बाताचीत की। संयुक्त बयान में कहा गया कि यह समस्या अराकान रोहिंग्या सॉल्वेशन आर्मी के उग्रवादियों के कारण उत्पन्न हुयी है जिससे सुरक्षा बलों एवं स्थानीय निवासियों को हानि पहुँची है।
यूरोपीय संघ वर्तमान में किन समस्याओं का सामना कर रहा है?
- यूरोपीय संघ के समक्ष ब्रेक्जिट से जो समस्या प्रारम्भ हुयी थी वह अभी तक जारी है। यूरोपीय संघ के कई अन्य सदस्य देश राष्ट्रीय सम्प्रभुता के सम्बंध् में बु्रसेल्स के अधिकार पर प्रश्न उठा रहे हैं।
- इसी प्रकार इस क्षेत्रा में कैटालोनिया संकट ने भी क्षेत्रा में सम्प्रभुता के सम्बंध में एक नई बहस को प्रारम्भ किया है। ज्ञातव्य है कि कैटालोनिया का प्रांत स्पेन से अलग होना चाहता है।
- ब्रेक्जिट की प्रक्रिया जारी है। ब्रिटेन 2019 तक यूरोपीय संघ को पूरी तरह से छोड़ देगा।
भारत एवं यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति क्यों नहीं बन सकी?
- यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा निवेशक है। भारत के वैश्विक व्यापार में इसकी भागीदारी 13 प्रतिशत से अधिक है। इन मजबूत आर्थिक सम्बंधों के बावजूद दोनों के बीच मुक्त व्यापर समझौते पर सहमति नहीं बन सकी। जिसके कारण निम्नवत हैं-
- यूरोपीय संघ भारत से बौद्धिक सम्पदा अधिकार पर सख्ती बरतने की इच्छा रखता है। उसके अनुसार भारत में बौद्धिक सम्पदा सम्बंधी नियम-कानून काफी ढीले हैं।
- यूरोपीय संघ चाहता है कि भारत ऑटोमोबाइल एवं स्पिरिट के मामले में शुल्क की कटौती करे।
- इसी प्रकार भारत चाहता है कि सेवाओं पर यूरोपीय संघ उसे अनुकूल छूट प्रदान करे तथा सूचना प्रौद्योगिकी एवं भारतीय पेशेवरों को अबाध आवाजाही की सुविधा दे।
- यूरोपीय संघ भारत के साथ मुक्त व्यापर समझौते से पहले ‘द्विपक्षीय निवेश संधि’ (Bilateral InvestmentTreaty) करना चाहता है जबकि भारत द्विपक्षीय निवेश संधि एवं मुक्त व्यापार समझौते पर समग्र वार्ता करना चाहता है।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि 14वाँ सम्मेलन भारत एवं यूरोपीय संघ के द्विपक्षीय संबंधों को नयी मजबूती प्रदान करेगा। साथ ही दोनों देशों को मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्रातिशीघ्र अंतिम रूप देना चाहिए ताकि निहित व्यापारिक संभावनाओं का दोहन किया जा सके।