मुम्बई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का शिलान्यास 14 सितम्बर 2017 को अहमदाबाद में किया गया तथा इस पर तीव्र गति से काम प्रारम्भ हो गया है। यद्यपि इस परियोजना में 1,08,000 करोड़ रूपये की लागत का अनुमान है, फिर भी इस परियोजना को कम लागत की परियोजना माना जा रहा है।
इसका प्रमुख कारण यह है कि इस परियोजना के लिए जापान सरकार भारत को 88 हजार करोड़ रूपये का सस्ता ऋण प्रदान करेगी। इस 88 हजार करोड़ के ऋण पर भारत को मात्रा 0.1 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा। सबसे बढ़कर यह कर्ज 50 वर्ष के लिए होगा अतः भारत सरकार के ऊपर ऋण अदायगी का कोई दबाव भी नहीं होगा। यदि यही ऋण विश्व बैंक या अन्य एजेन्सी से लिया जाता तो भारत को 5-7 प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज देना पड़ता।
क्या बुलेट ट्रेन परियोजना में जापान की मदद लेकर भारत उस पर आश्रित हो गया है?
बुलेट ट्रेन परियोजना में जापान की मदद लेकर भारत उस पर आश्रित नहीं हुआ है। निम्न तथ्यों से इस बात की पुष्टि की जा सकती है -
- बुलेट ट्रेन परियोजना के संबंध में भारत एवं जापान के बीच जो समझौता हुआ है उसका उद्देश्य मेक-इन-इण्डिया को बढ़ावा देने के साथ-साथ नवीन तकनीकी का आयात भी है।
- जापान की सहायता से गुजरात के बड़ोदरा में ‘हाई स्पीड रेल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट’ बनाया जा रहा है। इस इंस्टीट्यूट में अगले तीन वर्षों में चार हजार कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जायेगा ताकि बुलेट ट्रेन संचालित करने के लिए विदेशी कर्मियों पर निर्भर न रहना पड़े।
- इसके अतिरिक्त भारतीय रेल के तीन सौ युवा अधिकारियों को जापान में प्रशिक्षित किया जा रहा है जो हाई स्पीड ट्रैक तकनीक को समझकर भारत में उसका बेहतर इस्तेमाल कर सकेंगे।
- सबसे बढ़कर जापान से भारत को ‘शिन्कान्सेन’ तकनीक हासिल होगी। ज्ञातव्य है कि ‘शिन्कासेन’ तकनीक को उसकी गति, विश्वसनीयता एवं सुरक्षा व्यवस्था के लिए पिछले 50 वर्षों में कोई चुनौती नहीं दे सका है।
बुलेट ट्रेन किस प्रकार रोजगार एवं अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी?
- मुम्बई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में तकरीबन 20 हजार लोगों को निर्माण के क्षेत्र में रोजगार प्राप्त होगा।
- बुलेट ट्रेन परियोजना के संचालन के लिए 4000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा तथा 20,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होंगे।
- शहरी आधारभूत संरचना का विकास होगा जिससे औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। सबसे बढ़कर इससे अन्य तीव्र गति वाली परियोजनाओं की क्षमता में भी वृद्धि होगी।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि जापान की वित्तीय एवं तकनीकी मदद के कारण बुलेट ट्रेन परियोजना भारत के लिए वहनीय (Affordable) है। इससे भारत जापान के उफपर आश्रित नहीं हुआ है बल्कि यह देश में तीव्र गति वाली परियोजनाओं का मार्ग प्रशस्त करेगी जिससे देश का विकास होगा।