कलिंग शासक खारवेल का महत्वपूर्ण तथ्यों सहित संपूर्ण जानकारी

प्राचीन कलिंग में आधुनिक उड़ीसा प्रदेश के पुरी तथा गंजाम जिले के अतिरिक्त कुछ समीपवर्ती प्रदेश भी सम्मलित थे।
 जिस समय मगध में पुष्यमित्र शुंग शासन करता था उसी समय कलिंग में बहुत ही बहादुर राजा खारवेल का शासन था। यह इतना बहादुर था कि दक्षिण में जिन क्षेत्रों को चन्द्र गुप्त भी अपने अधीन नहीं कर सका खारवेल ने उन क्षेत्रों को अपने अधीन कर लिया।खारवेल कलिंग के तीसरे वंश चेदी वंश का महान शासक था। यह जैन धर्म का अनुयाई था। 
 उड़ीसा के भूनेस्वर से तीन मील दक्षिण में स्थित उदयगिरी पर्वत पर पर स्थित गुफा में एक अभिलेख मिला जिसे हाथी गुंफा  के अभिलेख के नाम से जाना जाता है, का निर्माण कलिंग राज खारवेल ने करवाया था। यह अभिलेख ब्राम्ही लिपि तथा प्राकृत भाषा में लिखा गया है।
 यह अभिलेख बहुत हद तक समुद्र गुप्त के प्रयाग प्रशस्ति से मिलता जुलता है।
अभिलेख में कहा गया है कि २४ वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद खारवेल को कलिंग के शासक के रूप में राज्याभिषेक हुआ। अपने शासन के ११ वे वर्ष में खारवेल ने दक्षिण भारत पर आक्रमण कर एक राजा की राजधानी पुथुंड को जीत कर वहां गदहो का हल चलवा दिया था। 
उसके अभिलेख में उसके शासनकाल का उल्लिखित अंतिम वर्ष तेरहवां वर्ष है । किंतु इससे यह ज्ञात नहीं होता की यह इसके शासन का अंतिम वर्ष था या उसने और अधिक शासन किया।
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