विशेषण की रचना और उनके प्रयोग
1. आकारान्त विशेषण पुल्लिंग में प्रायः आकारान्त ही रहते हैं किन्तु स्त्रीलिंग में ईकारान्त हो जाते हैं। यथा-
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पुल्लिंग
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स्त्रीलिंग
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अच्छा लड़का
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अच्छी लड़की
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बड़ा आदमी
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बड़ी स्त्री
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छोटा लड़का
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छोटी लड़की
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संस्कृत में विशेषण का रूपान्तर विशेष्य के लिंग-वचन से होता है। किन्तु हिन्दी में केवल आकारान्त विशेषण में ऐसा रूपान्तर होता है। यथा-
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संस्कृत
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हिन्दी
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दुष्ट व्यक्ति
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दुष्ट व्यक्ति
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दुष्टा स्त्री
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दुष्ट स्त्री
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संस्कृत में सुन्दर का स्त्रीलिंग रूप सुन्दरी, सुशील का सुशीला होता है परन्तु हिन्दी में यह रूप परिवर्तन नहीं होता। यथा-सुन्दर पुरूष, सुन्दर स्त्री।
2. पुल्लिंग में विभक्ति या परसर्ग लगने पर उसमें (विशेषण) परिवर्तन आ जाता है। यथा-
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एकवचन
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बहुवचन
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अच्छा घोड़ा
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अच्छे घोड़े
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अच्छे घोड़े को
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अच्छे घोड़ो को
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अच्छा लड़का
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अच्छे लड़के
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टिप्पणी-अच्छा का प्रयोग बहुवचन ‘अच्छे’ के रूप में विभक्ति (परसर्ग) लगने पर एकवचन और बहुवचन दोनों में होता है।
3. आकारान्त विशेषण बहुवचन में प्रायः एकारान्त में बदल जाता है। यथा-
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बड़ा
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:
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बड़े
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छोटा
|
:
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छोटे
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थोड़ा
|
:
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थोड़े
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अच्छा
|
:
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अच्छे
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4. कुछ विशेषण स्त्रीलिंग और पुल्लिंग में समान होते है। उनमें कोई विकार या परिवर्तन नहीं होता। यथा-
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सुखी लड़का
|
:
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सुखी लड़की
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दुखी पुरूष
|
:
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दुखी स्त्री
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5. विशेषण का संज्ञा की तरह प्रयोग प्रायः देखने में आता है। यथा-अमीरों और गरीबों के बीच खाई बढ़ती जा रही है।
6. उपसर्गों की सहायता से विशेषण बनाए जाते हैं। यथा-
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उपसर्ग
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प्रति
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स
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निर्
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प्र
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दुर
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निः
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शब्द
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प्रतिकूल
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सगुण
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निर्गुण
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प्रभूत
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दुर्गम
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निष्कपट
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7. संज्ञा पदों में प्रत्यय लगाकर विशेषण बनाया जाता है।
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प्रत्यय
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ई
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ईय
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इक
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आ
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मान्
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शब्द
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गुलाबी
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राष्ट्रीय
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ऐतिहासिक
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प्यासा
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श्रीमान्
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8. स्वतंत्र रूप से विशेषणों की संख्या कम है। आवश्यकतानुसार संज्ञा से विशेषण बनाया जाता है। यथा-
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संज्ञा
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:
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विशेषण
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संज्ञा
|
:
|
विशेषण
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अंक
|
:
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अंकित
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अभ्यास
|
:
|
अभ्यस्त
|
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उपेक्षा
|
:
|
उपेक्षित
|
उपन्यास
|
:
|
औपन्यासिक
|
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ऋण
|
:
|
ऋणी
|
घर
|
:
|
घरेलू
|
|
चक्षु
|
:
|
चाक्षुष
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तर्क
|
:
|
तार्किक
|
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दर्शन
|
:
|
दर्शनीय
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धन
|
:
|
धनी
|
|
निषेध
|
:
|
निषिद्ध
|
पिता
|
:
|
पैतृक
|
|
प्रमाण
|
:
|
प्रणम्य
|
भाव
|
:
|
भावुक
|
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माता
|
:
|
मातृक
|
यश
|
:
|
यशस्वी
|
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रस
|
:
|
रसिक, रसीला
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विशेष
|
:
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विशिष्ट
|
|
समय
|
:
|
सामयिक
|
सिद्धान्त
|
:
|
सैद्धान्तिक
|
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शास्त्र
|
:
|
शास्त्रीय
|
शासन
|
:
|
शासित
|
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हिंसा
|
:
|
हिंसक
|
क्षुधा
|
:
|
क्षुधित
|
|
अग्नि
|
:
|
आग्नेय
|
आदर
|
:
|
आदरणीय
|
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उत्कर्ष
|
:
|
उत्कृष्ट
|
उपार्जन
|
:
|
उपार्जित
|
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कल्पना
|
:
|
कल्पित
|
घृणा
|
:
|
घृणित
|
|
चाचा
|
:
|
चचेरा
|
तत्त्व
|
:
|
तात्विक
|
|
दान
|
:
|
दानी
|
नरक
|
:
|
नारकीय
|
|
पशु
|
:
|
पाशविक
|
परिचय
|
:
|
परिचित
|
|
पुष्टि
|
:
|
पौष्टिक
|
भोजन
|
:
|
भोज्य
|
|
मंगल
|
:
|
मांगलिक
|
योग
|
:
|
यौगिक
|
|
लक्षण
|
:
|
लाक्षणिक
|
विकल्प
|
:
|
वैकल्पिक
|
|
विपत्ति
|
:
|
विपन्न
|
साहित्य
|
:
|
साहित्यिक
|
|
स्त्री
|
:
|
स्त्रैण
|
शंका
|
:
|
शंकित
|
|
हृदय
|
:
|
हार्दिक
|
क्षमा
|
:
|
क्षम्य
|
|
ज्ञान
|
:
|
ज्ञानी
|
अंचल
|
:
|
आंचलिक
|
|
आधार
|
:
|
आधृत, आधारित
|
उद्योम
|
:
|
औद्योगिक
|
|
उपदेश
|
:
|
उपदिष्ट,उपदेशात्मक
|
काम
|
:
|
काम्य
|
|
चर्चा
|
:
|
चर्चित
|
छल
|
:
|
छलिया
|
|
तंत्र
|
:
|
तांत्रिक
|
देश
|
:
|
देशीय
|
|
नगर
|
:
|
नागरिक
|
परीक्षा
|
:
|
परीक्षित
|
|
पल्लव
|
:
|
पल्लवित
|
फेन
|
:
|
फेनिल
|
|
मन
|
:
|
मनस्वी
|
मेधा
|
:
|
मेधावी
|
|
राज
|
:
|
राजकीय
|
लेख
|
:
|
लिखित
|
|
विवाह
|
:
|
वैवाहिक
|
वाद
|
:
|
वादी
|
|
स्तुति
|
:
|
स्तुत्य
|
शक्ति
|
:
|
शाक्त
|
|
शिव
|
:
|
शैव
|
हवा
|
:
|
हवाई
|
|
क्षेत्र
|
:
|
क्षेत्रीय
|
उपेक्षा
|
:
|
उपेक्षित
|
|
ईश्वर
|
:
|
ईश्वरीय
|
उपनिषद
|
:
|
औपनिषिदिक
|
|
उपनिवेश
|
:
|
औपनिवेशिक
|
गंगा
|
:
|
गांगेय
|
|
चरित्र
|
:
|
चारित्रिक
|
जाति
|
:
|
जातीय
|
|
तिरस्कार
|
:
|
तिरस्कृत
|
देव
|
:
|
दिव्य
|
|
निशा
|
:
|
नैश
|
प्रमाण
|
:
|
प्रामाणिक
|
|
प्राची
|
:
|
प्राच्य
|
बुद्ध
|
:
|
बौद्ध
|
|
मानस
|
:
|
मानसिक
|
मर्म
|
:
|
मार्मिक
|
|
रंग
|
:
|
रंगीन
|
वेद
|
:
|
वैदिक
|
|
विश्वास
|
:
|
विश्वसनीय,विश्वस्त
|
व्यापार
|
:
|
व्यापारिक
|
|
समुदाय
|
:
|
सामुदायिक
|
शिक्षा
|
:
|
शिक्षित
|
|
शोषण
|
:
|
शोषित
|
हँसी
|
:
|
हँसोड़
|
|
क्षण
|
:
|
क्षणिक
|
|
:
|
|