Marital rape(वैवाहिक बलात्कार)

1. सरकार ने वैवाहिक बलात्कार के अपराधीकरण पर अनिच्छा व्यक्त की थी पर न्यायालय ने इसके पक्ष में निर्णय दिया है।

2. आईपीसी की धारा 375 विवाह के बाद जबरन संबंधों को वैध मानती है बशर्ते पत्नी की उम्र 15 वर्ष  से ऊपर हो। धारा 375 का यह अपवाद आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 2013 के तहत शामिल किया गया था।

3. महिलाओं को घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत सिविल उपचार उपलब्ध होते है।

4. जस्टिस वर्मा समिति ने कानून में वैवाहिक बलात्कार को अपवाद मानने वाले कानून को हटाने की सिफारिश की थी ,यह समिति 2012 के निर्भया कांड के बाद बनाई गई थी।

# अपराधीकरण के विपक्ष में तर्क

1. वैवाहिक संबंधों के अपराधीकरण से इसके दुरपयोग के मामले बढ़ेगे जैसे आईपीसी की धारा 498A के बढ़ते दुरपयोग को देखा जा सकता है जो दहेज उत्पीड़न से सम्बन्धित है।

2. हम कैसे पता लगाएंगे अर्थात बलात्कार और गैर बलात्कार संबंधों को सत्यापित कैसे करेगे।

3. विवाह जैसी संस्था कमजोर होगी जो हमारी संस्कृति  का भाग है ।

4. इससे पति पत्नी  में आपसी विश्वास  में कमी आयेगी अर्थात रिश्ते औपचारिक होने लगेंगे।

5. पत्नी शारीरिक संबंधों में असहमति जाता सकती है जिसके लिए पहले से कानून है और तलाक ले सकती है।

6. अप्रत्यक्ष हिंसा बढ़ सकती है तथा तलाक के मामले भी बढ़ सकते है।

# अपराधी कारण के पक्ष में तर्क

1. वर्तमान अवधारणा पितृ सत्तात्मक है जिसके कारण ही वैवाहिक बलात्कार को अपवाद माना गया है।

2. प्रत्येक जीव को अपने शरीर पर प्राकृतिक अधिकार होता है  इस प्रकार महिला को अपने शरीर पर पूरा अधिकार है , इस आधिकार को किसी भी परिस्थिति में खत्म नहीं किया  जा सकता।

3. कई देश इसे अपराध की श्रेणी में रख चुके है जिसमें पड़ोसी देश भी शामिल है जैसे भूटान, नेपाल, श्री लंका आदि।

# निष्कर्ष

इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि महिला से जोर जबर जस्ती नहीं होती , लेकिन क्या इसे अपराध मान भर लेने से समस्याएं दूर होगी, हमारा मुद्दा ये होना चाहिए कि कैसे इन समस्याओं को दूर किया जाय , उसके लिए सभी स्तर पर प्रयास किए जाएं जैसे शिक्षा सुधार, समाज सुधार , महिला सशक्तिकरण, अपराधी किस्म के लोगो का सामाजिक बहिष्कार , सरकारी सहायता पीड़ित वर्ग को आदि कदम उठाए जा  सकते है।

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